जीएसटी दर में समानता से कपास उद्योग को राहत मिलने के आसार
06-Sep-2025 12:59 PM
नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने एक तरफ विदेशों से रूई के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा को 31 दिसम्बर 2025 तक के लिए बढ़ा दिया है जबकि दूसरी ओर वस्त्र उद्योग के लिए जीएसटी की दर में संशोधन भी कर दिया है।
इससे टेक्सटाइल उद्योग को राहत मिलने की उम्मीद है। अमरीका द्वारा अनेक भारतीय उत्पादों पर 50 प्रतिशत का भारी-भरकम आयात शुल्क लगा दिए जाने से वहां भारत के वस्त्र उत्पादों का मूल्य गैर प्रतिस्पर्धी हो जाने की आशंका है। इस समस्या को दूर करने के लिए केन्द्र सरकार विशेष प्रयास कर रही है। अमरीका भारतीय वस्त्र उत्पादों का प्रमुख बाजार है।
टेक्सटाइल क्षेत्र के लिए जीएसटी दर में किए गए संशोधन से उत्पादों का लागत खर्च घटाने, निर्यात को बरकरार रखने तथा रोजगार का संकट खत्म करने में सहायता मिलेगी।
यद्यपि विदेशों से विशाल मात्रा में रूई का शुल्क मुक्त आयात होने से भारतीय कपास उत्पादकों को लाभप्रद वापसी हासिल करने में कठिनाई होगी मगर कपड़ा मंत्रालय ने स्पष्ट कर दिया है कि उसकी अधीनस्थ एजेंसी- भारतीय कपास निगम द्वारा 2024-25 की भांति 2025-26 के मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) में भी प्रमुख उत्पादक राज्यों में किसानों से न्यूतनम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर रूई की भरपूर खरीद की जाएगी।
रूई का न्यूनतम समर्थन मूल्य इस बार 589 रुपए प्रति क्विंटल बढ़ाकर मध्यम रेशेवाली श्रेणी के लिए 7710 रुपए प्रति क्विंटल तथा लम्बे रेशेवाली किस्मों के लिए 8110 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है।
2024-25 के मार्केटिंग सीजन में भारतीय कपास निगम (सीसीआई) द्वारा तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात एवं मध्य प्रदेश सहित अन्य राज्यों में किसानों से लगभग 100 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) रूई की भारी खरीद की गई थी।
सरकार का कहना है कि वर्ष 2030 तक भारत के टेक्सटाइल एवं अपारेल का बाजार फैलकर 350 अरब डॉलर पर पहुंच जाएगा और इस क्षेत्र के उत्पादों का घरेलू उपयोग एवं निर्यात बढ़ाने का गंभीर प्रयास जारी रखा जाएगा क्योंकि यह अत्यन्त विशाल उद्योग है और राष्ट्रीय अर्थ व्यवस्था के विकास में अत्यन्त महत्वपूर्ण योगदान देता है।
