जम्मू-कश्मीर में बादाम एवं अखरोट का उत्पादन बढ़ाने की जरूरत
20-Mar-2026 09:06 PM
श्रीनगर। देश में बादाम एवं अखरोट का अधिकांश उत्पादन जम्मू कश्मीर में होता है लेकिन घरेलू मांग एवं खपत में हो रही जोरदार बढ़ोत्तरी को पूरा करने में यह उत्पादन सक्षम नहीं है।
इसके फलस्वरूप भारत को अमरीकी एवं चिली सहित कई अन्य देशों से विशाल मात्रा में इसका आयात करना पड़ता है। अब अमरीका से द्विपक्षीय व्यापार समझौता होने के कारण बादाम का आयात और ही तेजी से बढ़ने की संभावना है।
दरअसल जम्मू कश्मीर के बादाम एवं अखरोट उत्पादकों को अनेक चुनौतियों एवं कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। जलवायु परिवर्तन एवं बदलते मौसम के कारण वहां पेड़ों पर समय से पहले पूर्व ही फूल एवं दाने आने लगते हैं, पेड़ भी काफी पुराने हो चुके हैं और उसकी क्षमता लगातार घटती जा रही है।
वहां उत्पादन की पद्धति काफी पुराणी है और नई तकनीक एवं आधुनिक विधि का इस्तेमाल बहुत कम हो रहा है। इसके अलावा विदेशों से होने वाला भारी आयात भी उसकी चुनौती को बढ़ा रहा है। इसके फलस्वरूप वहां उत्पादक बादाम के बजाए सेब के उत्पादन को प्राथमिकता दे रहे हैं।
पुलवामा के बादाम उत्पादकों का कहना है कि तेज गर्मी के कारण पेड़ों पर फूल जल्दी लग गए लेकिन यह शुभ लक्षण नहीं है क्योंकि इससे उत्पादन में गिरावट आ सकती है।
उत्पादन में जिस तरह गिरावट आ रही है उसे देखते हुए लगता है कि कश्मीर घाटी में बादाम के बचे-खुचे बागान भी अगले कुछ वर्षों में गायब हो सकते हैं। अखरोट उत्पादकों के साथ भी यही समस्या है।
घरेलू मांग एवं खपत की तुलना में देश के अंदर सिर्फ 10 प्रतिशत बादाम एवं 80-85 प्रतिशत अखरोट का उत्पादन होता है।
