जनवरी 2027 तक अल नीनो का प्रभाव रहने की संभावना

04-May-2026 11:44 AM

नई दिल्ली। भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) का कहना है कि अधिकांश मौसम मॉडल्स भारत में मानसून सीजन के दौरान अल नीनो के सक्रिय होने तथा जनवरी 2027 तक इसका प्रकोप एवं प्रभाव बरकरार रहने के संकेत दे रहे हैं।

ध्यान देने वाली बात है कि इसी अवधि के दौरान भारत में खरीफ एवं रबी फसलों की बिजाई एवं प्रगति होती है। अल नीनो की वजह से इन दोनों सीजन में वर्षा कम हो सकती है जिससे कृषि उत्पादन प्रभावित होने की आशंका रहेगी। 

मौसम विभाग के मुताबिक दक्षिण-पश्चिम मानसून 14-16 मई के आसपास अंडमान-निकोबार द्वीप समूह में पहुंच सकता है और वह कुछ समय तक सक्रिय रहने के बाद भारत की मुख्य भूमि में पहुंचेगा।

वर्तमान समय में विषुवतीय प्रशांत महासागर के ऊपर अल नीनो सॉदर्न ऑसिलेशन (एनसो) न्यूट्रल स्थिति में है मगर अल नीनो निर्माण की दिशा में आगे बढ़ता प्रतीत हो रहा है। इसका निर्माण एवं प्रभाव जनवरी 2027 तक कायम रह सकता है।

यद्यपि हिन्द महासगार का पॉजिटिव डायपोल (आईओडी) मानसूनी वर्षा के लिए सहायक साबित हो सकता है लेकिन अल नीनो की तीव्रता सघनता एवं गतिशीलता इस डायपोल से अधिक रहने की संभावना है इसलिए मानसून की वर्षा पर असर पड़ सकता है।  

खरीफ कालीन फसलों- धान, अरहर, उड़द, मूंग, मक्का ज्वार, बाजरा, रागी, सोयाबीन, मूंगफली एवं कपास आदि की खेती अगले महीने से शुरू होने वाली है। मानसून संभवतः नियत समय पर देश में पहुंच सकता है मगर समय गुजरने के साथ इसकी शक्ति एवं क्षमता घट सकती है।