जोरदार आयात के दबाव से दलहनों का भाव घटकर एमएसपी से नीचे आने की संभावना

24-Jan-2025 07:32 PM

मुम्बई । म्यांमार, कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, रूस एवं अफ्रीकी देशों से विशाल मात्रा में दलहनों का आयात होने और अब भी जारी रहने से घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ने के कारण कीमतों पर भारी दबाव पड़ने लगा है।

इसके फलस्वरूप दलहनों का दाम आगामी समय में घटकर केन्द्र सरकार द्वारा निर्धारित-न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे आने की संभावना है।

आई ग्रेन इंडिया के डायरेक्टर राहुल चौहान का कहना है कि दलहनों के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा नियमित रूप से बढ़ाई जा रही है।

लेकिन यह स्थिति सरकार के लिए सभी दलहनों का बफर स्टॉक बनाने की दृष्टि से अनुकूल है और इस सुनहरे मौके का फायदा उठाया जाना चाहिए।

सरकार बफर स्टॉक के लिए मूल्य समर्थन योजना (पीएसएस) तथा मूल्य स्थिरीकरण कोष (पीएसएफ) स्कीम के तहत दलहनों की खरीद की घोषणा पहले ही कर चुकी है। 

राहुल चौहान के अनुसार सरकार पीली मटर तथा उड़द एवं चना के शुल्क मुक्त आयात की समय सीमा को तुवर की तर्ज पर अगले एक साल के लिए बढ़ा सकती है। फिलहाल पीली मटर के लिए यह समय सीमा 28 फरवरी तथा उड़द-चना के लिए 31 मार्च 2025 तक निर्धारित है। 

बेहतर बाजार मूल्य के बावजूद चालू रबी सीजन के दौरान चना के बिजाई क्षेत्र में महज 2.5 प्रतिशत का इजाफा हुआ है जबकि मसूर के क्षेत्रफल में 2 प्रतिशत की गिरावट आ गई है।

राहुल चौहान के अनुसार फसलों का बिजाई क्षेत्र उस कीमत पर निर्भर करता है जो अपने स्टॉक की बिक्री से किसानों को प्राप्त होती है।

चना का भाव वर्ष 2024 में तेजी से बढ़ा और अगस्त में यह उछलकर 8000 रुपए प्रति क्विंटल के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया।

इससे किसानों को बिजाई क्षेत्र बढ़ाने का प्रोत्साहन तो मिला मगर गेहूं तथा मक्का पर वापसी ज्यादा मिलने के कारण चना के क्षेत्रफल में सीमित बढ़ोत्तरी हो सकी।