जोरदार बारिश एवं बाढ़ से खरीफ फसलों को नुकसान के संकेत

14-Aug-2025 06:31 PM

नई दिल्ली। देश के विभिन्न राज्यों में नियमित रूप से हो रही मानसूनी बारिश के कारण खेतों में पानी जमा होने तथा नदियों में उफान के कारण तटवर्ती क्षेत्रों में भयंकर बाढ़ आने से खरीफ फसलों को क्षति पहुंचने की सूचना मिल रही है।

हालांकि कुल मिलाकर इन फसलों का बिजाई क्षेत्र बढ़ा है मगर इसमें मुख्यतः धान एवं मक्का का योगदान है। अन्य फसलों (गन्ना को छोड़कर) का क्षेत्रफल या तो गत वर्ष के आसपास या उससे कुछ नीचे चल रहा है। इसमें तुवर, ज्वार,

बाजरा, मूंगफली, सोयाबीन एवं कपास आदि शामिल है। ध्यान देने की बात है कि ये फसलें खेतों में जल जमाव या उच्च नमी के प्रति ज्यादा संवेदनशील होती हैं और उसे अधिक दिनों तक सहन नहीं कर पाती हैं। 

दक्षिण-पश्चिम मानसून मध्य जुलाई से ही लगातार सक्रिय रहा है और इसके प्रभाव से देश के विभिन्न भागों में काफी अच्छी वर्षा हुई है। लेकिन जिन इलाकों में अत्यन्त मूसलाधार बारिश हुई वहां खेतों में खड़ी फसलें जलमग्न हो गई।

इसमें पहले राजस्थान, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं गुजरात जैसे राज्यों के कई जिले शामिल थे जबकि अब बिहार, बंगाल, झारखंड, उड़ीसा एवं छत्तीसगढ़ के भी कुछ जिले सम्मिलित हो गए हैं। उधर तेलंगाना एवं कर्नाटक के कुछ जिलों में हाल के दिनों में भारी वर्षा होने की सूचना मिली है। 

दलहन, तिलहन एवं कपास का रकबा गत वर्ष से पीछे चल रहा है जबकि इसकी बिजाई का आदर्श समय तेजी से समाप्त होता जा रहा है। कई क्षेत्रों में इन फसलों को नुकसान भी हुआ है जिससे उत्पादन पर असर पड़ सकता है।

विडंबना यह है कि भारत को इन फसलों के उत्पादन में जोरदार बढ़ोत्तरी करने की आवश्यक है ताकि विदेशों से दलहनों, खाद्य तेलों एवं रूई के आयात पर बढ़ती निर्भरता को घटाया जा सके।

सरकार इस दिशा में आवश्यक कदम उठा रही है जिसका प्रमाण यह है विभिन्न दलहनों (तुवर-उड़द), तिलहनों (सोयाबीन-मूंगफली) एवं कपास के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) 400 से 600 रुपए प्रति क्विंटल तक की जोरदार वृद्धि की गई है लेकिन वर्षा और बाढ़ पर सरकार का नियंत्रण नहीं है जो फसलों के लिए आफत बनी हुई है।

हालांकि राष्ट्रीय स्तर पर कुल वर्षा सामान्य औसत से बहुत ज्यादा नहीं हुई है लेकिन इसका वितरण असमान रहा है। इसके फलस्वरूप कहीं भारी अधिशेष वर्षा हुई है तो कहीं इसका अभाव भी महसूस किया जा रहा है।