जायद फसलों का बिजाई क्षेत्र 37.50 लाख हेक्टेयर से ऊपर पहुंचा
12-Mar-2025 01:09 PM
नई दिल्ली। ग्रीष्मकालीन या जायद सीजन की फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र इस वर्ष 7 मार्च तक बढ़कर 37.34 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 31 लाख हेक्टेयर से 21 प्रतिशत ज्यादा है। जायद फसलों की बिजाई का अभियान अगले कई सप्ताहों तक जारी रहेगा।
आधिकारिक सूत्रों के अनुसार जायद सीजन में फसलों की बिजाई में अच्छी प्रगति हो रही है। अनेक राज्यों में बांधों एवं जलाशयों में पानी का भंडार कम होने के बावजूद किसान इसकी खेती करने में अच्छी दिलचस्पी दिखा रहे हैं।
केवल मूंगफली तथा कुछ अन्य तिलहनों को छोड़कर शेष सभी जायद फसलों का रकबा गत वर्ष से ऊपर चल रहा है जिसमें धान, मक्का, बाजरा एवं दलहन आदि शामिल है।
जायद फसलों का सामान्य औसत क्षेत्रफल इस बार 71.34 लाख हेक्टेयर आंका गया है जबकि इसके 50 प्रतिशत से अधिक भाग में बिजाई पूरी हो चुकी है। जायद फसलों की बिजाई फरवरी से मई के बीच में होती है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के साप्ताहिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की तुलना में चालू वर्ष के दौरान ग्रीष्मकालीन धान का उत्पादन क्षेत्र 11.5 प्रतिशत बढ़कर 27.13 लाख हेक्टेयर तथा पोषक / मोटे अनाजों का रकबा 1.99 लाख हेक्टेयर से 45 प्रतिशत उछलकर 2.88 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
पोषक या मोटे अनाजों के संवर्ग में मक्का का उत्पादन क्षेत्र 1.53 लाख हेक्टेयर से 28 प्रतिशत बढ़कर 1.97 लाख हेक्टेयर, बाजरा का बिजाई क्षेत्र 33 हजार हेक्टेयर से 59 प्रतिशत उछलकर 53 हजार हेक्टेयर तथा ज्वार का क्षेत्रफल 7 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 30 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया।
इसी तरह ग्रीष्मकालीन दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 2.05 लाख हेक्टेयर की तुलना में इस बार दोगुने से भी ज्यादा बढ़कर 5.02 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा।
इसके तहत मूंग का रकबा 1.34 लाख हेक्टेयर से 168 प्रतिशत उछलकर 3.58 लाख हेक्टेयर तथा उड़द का क्षेत्रफल 63 हजार हेक्टेयर से 106 प्रतिशत बढ़कर 1.30 लाख हेक्टेयर हो गया।
ग्रीष्मकालीन दलहनों के प्रमुख उत्पादक राज्यों में मध्य प्रदेश, बिहार, उड़ीसा, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश एवं गुजरात आदि शामिल है।
लेकिन तिलहन फसलों की बिजाई धीमी गति से हो रही है और इसका उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष के 2.63 लाख हेक्टेयर से घटकर 2.51 लाख हेक्टेयर रह गया।
इसके तहत मूंगफली का बिजाई क्षेत्र 1.67 लाख हेक्टेयर से गिरकर 1.55 लाख हेक्टेयर रह गया। इसके अलावा 15 हजार हेक्टेयर में सूरजमुखी तथा 78 हजार हेक्टेयर में तिल की खेती हुई है जो पिछले साल के लगभग बराबर ही है।
