कच्ची चीनी को शुगर कंट्रोल आर्डर की परिधि में शामिल करने का फैसला

02-May-2025 03:12 PM

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने 1 मई 2025 को चीनी (नियंत्रण) आदेश, 1966 की समीक्षा करते हुए कच्ची चीनी (रॉ शुगर) को इसके विनियमन की परिधि (सीमा) में लाने का फैसला किया।

इसके साथ ही अब रॉ शुगर को समूचे देश में चीनी के कुल स्टॉक का हिस्सा माना जायेगा और वास्तविक स्टॉक का आंकड़ा सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध भी करवाया जाएगा।

इस निर्णय से केन्द्र सरकार कच्ची चीनी के नाम पर भ्रामक जानकारी देने की प्रवृत्ति पर अंकुश लगने की उम्मीद है। हाल के वर्षों में इसकी लोक प्रियता बढ़ती जा रहे है और खांडसारी या ऑर्गेनिक के नाम से इसकी बिक्री की जाती है। 

केन्द्रीय खाद्य मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारिक सूत्रों के अनुसार जिन खांडसारी चीनी इकाइयों की दैनिक गन्ना क्रशिंग क्षमता 500 टन से ज्यादा है उसे चीनी नियंत्रण आदेश, 2025 में शामिल कर लिया गया है।

इसके शामिल होने से अब खांडसारी शुगर फैक्ट्रीज को भी किसानों को गन्ना का उचित एवं लाभप्रद मूल्य (एफआरपी) चुकाना होगा और इसके भुगतान की प्रक्रिया सुनिश्चित करने में मदद मिलेगी। इसी तरह चीनी के उत्पादन का वास्तविक अनुमान लगाना भी संभव हो सकेगा। 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देशभर में कुल 373 खांड़सारी इकाइयां क्रियाशील हैं जिसकी कुल दैनिक गन्ना पेराई क्षमता 500 टन से अधिक है। इन इकाइयों के पास रोजाना करीब 55,200 टन गन्ना की क्रशिंग करने की क्षमता मौजूद है।

इसके अलावा विभिन्न तरह के सह उत्पादों जैसे गन्ना की लुग्दी, शीरा, प्रेस मड केक या कोई अन्य वैकल्पिक उत्पाद (शीरा, गन्ना जूस, शुगर सीरप एवं चीनी से निर्मित एथनॉल आदि को भी इस  नियंत्रण आदेश के दायरे में शामिल किया गया है क्योंकि ये उत्पाद गन्ना से चीनी के उत्पादन को प्रभावित करते हैं।

आधिकारिक सूत्रों के अनुसार सरकार इस नियंत्रण आदेश के सहारे चीनी के कुल डायवर्जन को विनियमित करने में सक्षम हो जाएगी। इस नियंत्रण आदेश में व्हाइट शुगर, रिफाइंड शुगर,

खांडसारी शुगर, गुड़, बूरा चीनी, क्यूब शुगर, आइसिंग शुगर तथा सामान्य चीनी की परिभाषा भी दी गई है जिसे भारतीय खाद्य सुरक्षा एवं मानक प्राधिकरण से लिया गया है।