कम बारिश एवं रोगों के प्रकोप से कर्नाटक में तुवर की फसल प्रभावित
12-Dec-2024 12:55 PM
कलबुर्गी । देश के सबसे प्रमुख अरहर (तुवर) उत्पादक राज्य- कर्नाटक में इस बार दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के बाद बारिश बहुत कम होने तथा रोगों-कीड़ों का प्रकोप रहने से फसल प्रभावित हुई है।
कर्नाटक के सबसे प्रमुख उत्पादक जिला- कलबुर्गी (गुलबर्गा) में तुवर की फसल को विशेष नुकसान होने के संकेत मिल रहे हैं। इससे किसान काफी चिंतित और परेशान हैं।
कर्नाटक में तुवर का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष के 13.64 लाख हेक्टेयर से बढ़कर इस वर्ष 15.94 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा। इसी तरह गुलबर्गा जिले में इस महत्वपूर्ण दलहन फसल का रकबा 5.87 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 6.27 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
शुरुआती चरण में फसल की हालत काफी अच्छी थी और उत्पादन बेहतर होने की उम्मीद की जा रही थी लेकिन बाद में कुछ कारणों से इसकी स्थिति खराब होने लगी।
नवम्बर 2024 के दौरान कलबुर्गी जिले में सामान्य औसत से 71 प्रतिशत कम बारिश हुई जबकि तुवर के पौधे में फूल और दाना लगने का यह महत्वपूर्ण समय माना जाता है। वहां 19.5 मि०मी० के सामान्य औसत के मुकाबले केवल 5.6 मि०मी० वर्षा हुई।
कृषि विशेषज्ञों के अनुसार फूल तथा दाना लगने के महत्वपूर्ण चरण के दौरान बहुत कम बारिश होने से कई इलाकों में फसल का ठीक से विकास नहीं हो पाया क्योंकि खेतों की मिटटी में नमी का पर्याप्त अंश मौजूद नहीं था।
इसी तरह फसल को रोगों-कीड़ों के आघात से भी काफी नुकसान होने की आशंका है। वहां फसल को हुई क्षति का आंकलन करने के लिए सर्वेक्षण जारी है जिसके पूरा होने में कुछ समय लगेगा और उसके बाद ही हानि का पता चलेगा।
लेकिन काली मिटटी वाले परम्परागत उत्पादक क्षेत्र में फसल की हालत सामान्य बनी हुई है। तेलंगाना से सटे इलाकों में फसल की हालत बेहतर बताई जा रही है। रोट रोग का प्रकोप कई क्षेत्रों में धीरे-धीरे फैलता जा रहा है।
तुवर के पौधे कुछ क्षेत्रों में नीचे झुक गए हैं जिसमें कम दाने लगने की आशंका है। इससे उपज दर में गिरावट आ सकती है। कुल मिलाकर लगभग 2 लाख हेक्टेयर भूमि में तुवर की फसल प्रभावित होने का अनुमान लगाया जा रहा है।
