कम लागत एवं बेहतर उत्पादन से कृषि क्षेत्र की लाभप्रदता में सुधार के आसार
12-Dec-2024 01:41 PM
नई दिल्ली । अखिल भारतीय स्तर पर 2024-25 के खरीफ सीजन में कृषि क्षेत्र की लाभप्रदता में कुल मिलाकर कुछ सुधार आने के आसार हैं क्योंकि एक तो उत्पादन अपेक्षाकृत बेहतर होने के संकेत मिल रहे हैं और दूसरे, फसलों के लागत खर्च में कमी आ गई।
दक्षिण-पश्चिम मानसून के सीजन मे भरपूर वर्षा होने से किसानों को सिंचाई पर ज्यादा पैसा खर्च नहीं करना पड़ा। लेकिन कुछ कृषि उत्पादों का बाजार भाव घटने से कुछ लाभप्रदता में ज्यादा इजाफा नहीं हो सकेगा।
हाल ही में जारी एक रिपोर्ट के अनुसार कृषि क्षेत्र में क्षेत्रीय स्तर पर लाभप्रदता का आंकलन करने से पता चलता है कि दक्षिणी राज्यों की तुलना में उत्तरी भारत में इसकी हालत बेहतर रहने की उम्मीद है जबकि देश के पूर्वी एवं पश्चिमी भाग में मिश्रित रुख रहेगा।
समूचे देश में फार्मर प्रोड्यूसर ऑर्गेनाइजेशन (एफपीओ) तथा कृषक संगठनों एवं किसानों से की गई पूछताछ के आधार पर तैयार की गई इस रिपोर्ट में फसल की वास्तविक स्थिति जानने-समझने का प्रयास किया गया और फिर उसके प्रचलित औसत बाजार भाव का आंकलन किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक देश के उत्तरी भाग में अच्छी वर्षा होने से फसल की उपज दर पिछले साल से बेहतर देखी जा रही है जिसमें खासकर धान का विशेष योगदान है। दूसरी ओर दक्षिणी राज्यों तथा गुजरात में फसल की हालत ज्यादा अच्छी नहीं देखी गई क्योंकि वहां अत्यन्त मूसलाधार वर्षा होने तथा भयंकर बाढ़ का प्रकोप रहने से फसलों को भारी क्षति हुई।
उत्तरी क्षेत्र के प्रमुख कृषि उत्पादक राज्यों-बिहार, पंजाब, हरियाणा, मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश एवं राजस्थान में खरीफ फसलों का उत्पादन अपेक्षाकृत बेहतर होने के आसार हैं।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के प्रथम अग्रिम अनुमान के अनुसार पिछले साल की तुलना में चालू खरीफ सीजन के दौरान खाद्यान्न एवं तिलहनों के उत्पादन में क्रमश: 6 प्रतिशत एवं 7 प्रतिशत की वृद्धि होने की संभावना है।
खरीफ कालीन फसलों के कुल उत्पादन क्षेत्र में खाद्यान्न एवं तिलहनों की संयुक्त भागीदारी 84 प्रतिशत से भी अधिक आंकी गई। लेकिन दूसरी ओर गन्ना तथा कपास जैसी औद्योगिक फसलों के उत्पादन में क्रमश: 3 प्रतिशत तथा 8 प्रतिशत की गिरावट आने का अनुमान लगाया गया है जिससे किसानों की कुल आमदनी में सीमित बढ़ोत्तरी संभव हो सकेगी।
