कम से कम अक्टूबर तक चीनी के निर्यात पर प्रतिबंध जारी रखने के संकेत

03-Jul-2024 05:50 PM

नई दिल्ली । भारत से चीनी के निर्यात पर पिछले साल से ही अनिश्चितकालीन प्रतिबंध लगा हुआ है और वरिष्ठ सरकारी अधिकारीयों ने संकेत दिया है कि कम से कम अक्टूबर 2024 तक निर्यात प्रतिबंध में कोई ढील या रियायत नहीं दी जाएगी।

अगले सीजन के लिए गन्ना की खेती में होने वाली प्रगति की समीक्षा करने के बाद ही चीनी की निर्यात नीति में बदलाव करने पर विचार किया जा सकता है। 

उल्लेखनीय है कि शीर्ष उद्योग संस्था- इस्मा ने आंकड़ों का हवाला देते हुए सरकार के निर्यात की अनुमति देने का आग्रह किया है। उसका कहना है कि वर्तमान मार्केटिंग सीजन के अंत में 35-36 लाख टन चीनी का अतिरिक्त  अधिशेष स्टॉक बच जाएगा जिसमें से कुछ भाग के निर्यात की स्वीकृति दी जानी चाहिए। 

ध्यान देने की बात है कि भारत दुनिया में चीनी का सबसे प्रमुख खपतकर्ता और ब्राजील के बाद दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक देश है। जून 2023 में सरकार ने चीनी का निर्यात अक्टूबर तक रोकने का निर्णय लिया था और जब इसके घरेलू उत्पादन में गिरावट आने की आशंका पैदा हुई तब निर्यात प्रतिबंध की अवधि को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया गया।

इसके साथ-साथ एथनॉल निर्माण में चीनी के उपयोग को भी सीमित कर दिया गया। इसके फलस्वरूप घरेलू प्रभाग में चीनी की आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति सुगम बनी रही। 

वैसे निर्यात पर प्रतिबंध लागू होने के बावजूद चीनी के खुदरा बाजार भाव में कुछ तेजी देखी जा रही है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 30 जून 2024 को चीनी का औसत खुदरा मूल्य बढ़कर 44.41 रुपए प्रति किलो पर पहुंच गया जबकि 20 जून 2023 को यह 42.74 रुपए प्रति किलो चल रहा था। 

आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक इस वर्ष देश में अच्छी वर्षा होने की भविष्यवाणी की जा रही है लेकिन गन्ना का उत्पादन क्षेत्र ही यह निर्धारित करेगा कि चीनी के निर्यात की स्वीकृति दी जाए या नहीं।

कम से कम तत्काल इस मामले की कोई समीक्षा नहीं होने वाली है। निर्यात पर प्रतिबंध लागू होने से चीनी के दाम में अप्रत्याशित तेजी को नियंत्रित करने में सहायता मिली है।

यदि पाबंदी नहीं लगी होती तो चीनी का दाम मौजूदा स्तर से काफी ऊंचा हो सकता था जिससे आम आदमी की कठिनाई और भी बढ़ सकती थी।