कीमत प्रतिस्पर्धी होने से मक्का का निर्यात सुधरने के आसार

09-Jan-2026 01:05 PM

मुम्बई। शानदार घरेलू उत्पादन, ऊंचे स्टॉक एवं प्रतिस्पर्धी मूल्य के कारण भारत से अब मक्का के निर्यात में बढ़ोत्तरी होने के अच्छे संकेत मिल रहे हैं। उल्लेखनीय है कि 2024-25 के मार्केटिंग सीजन के दौरान भारत से मक्का का निर्यात घटकर पिछले 5 साल के निचले स्तर पर सिमट गया था क्योंकि इसका भाव ऊंचा चल रहा था। 

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार अप्रैल-अक्टूबर - 2025 के सात महीनों के दौरान भारत से मक्का का निर्यात बढ़कर 2.80 लाख टन से ऊपर पहुंच गया जो वर्ष 2024 के इन्हीं महीनों के शिपमेंट 2.36 लाख टन से करीब 20 प्रतिशत ज्यादा है।

इसी तरह अप्रैल-अक्टूबर 2025 में मक्का के निर्यात से प्राप्त आमदनी भी उछलकर 11.249 करोड़ डॉलर पर पहुंच गई जो अप्रैल-अक्टूबर- 2024 की निर्यात आय 8.763 करोड़ डॉलर से 28 प्रतिशत अधिक रही। 

आईग्रेन इंडिया के डायरेक्टर एवं अग्रणी बाजार विश्लेषक राहुल चौहान के अनुसार मक्का के निर्यात शिपमेंट में अच्छी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है क्योंकि इसका दाम आकर्षक एवं लाभप्रद बना हुआ है।

लेकिन एक प्रमुख खरीदार- बांग्ला देश में मौजूदा अराजक स्थिति को देखते हुए निर्यातक काफी शतर्क हो गए हैं। पिछले वित्त वर्ष के दौरान भारत से मक्का का निर्यात तेजी से घट गया था क्योंकि इसका घरेलू बाजार भाव वैश्विक मूल्य से काफी ऊंचा चल रहा था। 

प्राप्त जानकारी के मुताबिक वित्त वर्ष 2024-25 की सम्पूर्ण अवधि (अप्रैल-मार्च) के दौरान भारत से मक्का का कुल निर्यात घटकर 5.56 लाख टन पर अटक गया था जिससे 20.117 करोड़ डॉलर की आमदनी प्राप्त हुई थी।

पॉल्ट्री, एथनॉल एवं स्टार्च निर्माण उद्योग में जोरदार मांग रहने से मक्का की कीमतें काफी ऊंची हो गई थीं। उससे पूर्व 2023-24 के वित्त वर्ष में भारत से 44.30 करोड़ डॉलर मूल्य के 14.42 लाख टन मक्का का निर्यात हुआ था। 

एक अग्रणी उद्योग समीक्षक के अनुसार पिछले साल एक तरफ भारत में मक्का का भाव ऊंचा एवं तेज चल रहा था तो दूसरी ओर वैश्विक उत्पादन में वृद्धि होने से अंतर्राष्ट्रीय बाजार मूल्य नरम पड़ गया था।

इसके फलस्वरूप भारतीय मक्का के कुछ परम्परागत खरीदार देश भी अमरीका एवं लैटिन अमरीकी देशों से मक्का का आयात बढ़ाने लगे। लेकिन 2025-26 के दौरान परिदृश्य में कुछ बदलाव आने के स्पष्ट संकेत मिल रहे हैं।