कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में दलहनों के उत्पादन आंकड़ों पर गहरी नजर रखने की जरूरत
01-Oct-2025 04:56 PM
मुम्बई। हालांकि भारत की भांति कनाडा एवं ऑस्ट्रेलिया में भी दलहनों के सरकारी एवं व्यापारिक उत्पादन अनुमान में भारी अंतर रहता है मगर जहां भारत में इसका सरकारी आंकड़ा शुरुआत में ज्यादा ऊंचा रहता है वहीं कनाडा-ऑस्ट्रेलिया में बाद में उत्पादन अनुमान का आंकड़ा बढ़ाया जाता है ताकि बाजार भाव में स्थिरता या मजबूती बरकरार रह सके।
ऑस्ट्रेलिया का उदाहरण द्रष्टव्य है। सरकारी एजेंसी- अबारेस ने 2025-26 सीजन के दौरान 21 लाख टन चना तथा रिकॉर्ड 17 लाख टन मसूर के घरेलू उत्पादन का अनुमान व्यक्त किया है
जबकि उद्योग- व्यापार क्षेत्र के विश्लेषक इससे सहमत नहीं हैं और वे 23 से 25 लाख टन के बीच चना तथा 18 लाख टन से ज्यादा मसूर के उत्पादन की संभावना व्यक्त कर रहे हैं।
2024-25 के सीजन में भी इसी तरह का पैटर्न सामने आया था जब शुरूआती चरण में 18 लाख टन चना के उत्पादन की संभावना व्यक्त की गई थी लेकिन बाद में इस आंकड़े को 22.67 लाख टन के नए रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ा दिया गया। इसी तरह मसूर के उत्पादन अनुमान में भी बदलाव किया गया।
जहां तक कनाडा का सवाल है तो वहां भी दलहनों के उत्पादन अनुमान का पैटर्न ऑस्ट्रेलिया से ज्यादा भिन्न नहीं है। चालू वर्ष के लिए कनाडा की सरकारी एजेंसी- स्टैट्स कैन ने 35.60 लाख टन मटर तथा 29.72 लाख टन मसूर के घरेलू उत्पादन की संभावना व्यक्त की है जबकि एक अग्रणी प्राइवेट एजेंसी (फर्म) ने इससे असहमति जताते हुए मटर का उत्पादन 37.50 लाख टन तथा मसूर का उत्पादन 36 लाख टन होने का अनुमान लगाया है।
आई ग्रेन इंडिया का मानना है कि वैश्विक बाजार में कीमतों को गिरने से रोकने तथा उत्पादकों को प्रोत्साहित करने के लिए कनाडा एवं ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों में शुरूआती चरण के दौरान दलहनों का उत्पादन अनुमान छोटा रखा जाता है।
इस पैटर्न पर भारतीय आयातकों को गहरी नजर रखने की आवश्यकता है। सीजन के बढ़ते चरण के साथ बाजार पर असर साफ दिखाई पड़ने लगता है।
भारत में स्थिति उससे अलग है। यहां आरंभ में ही काफी ऊंचा उत्पादन अनुमान प्रस्तुत कर लिया जाता है जिससे दलहनों के घरेलू बाजार मूल्य पर दबाव बढ़ जाता है और किसानों तथा व्यापारियों को नुकसान उठाना पड़ता है।
चूंकि भारत दलहनों का एक प्रमुख आयातक देश है इसलिए आयातकों को आपूर्तिकर्ता देशों के उत्पादन आंकड़े के खेल को गहराई से समझना आवश्यक है।
