केन्द्रीय बजट में कृषि क्षेत्र के कुछ महत्वपूर्ण घटकों पर विशेष ध्यान देने की जरूरत

23-Jan-2025 04:02 PM

नई दिल्ली । यद्यपि हाल के वर्षों में भारतीय कृषि क्षेत्र का अच्छा विकास विस्तार हुआ है और खाद्यान्न सहित कुछ अन्य महत्वपूर्ण जिंसों के उत्पादन में आत्मनिर्भरता भी हासिल हो चुकी है लेकिन इसके बावजूद कई ऐसी चुनौतियां एवं बाधाएं अभी मौजूद हैं जिसे दूर करने के लिए सरकारी सहयोग-समर्थन एवं प्रोत्साहन की विशेष आवश्यकता है।

केन्द्रीय आम बजट में कृषि क्षेत्र के विकास को हमेशा प्राथमिकता दी जाती रही है और इसके लिए अत्यन्त विशाल धनराशि का आवंटन भी होता है।

इसके फलस्वरूप कृषि क्षेत्र का कुछ भाग विकसित हो गया लेकिन कुछ अन्य हिस्सा अब भी या तो पिछड़ा हुआ है या विकसित नहीं हो पाया है। 

मोदी सरकार के तीसरे कार्यकाल का पहला पूर्ण बजट जल्दी ही संसद में पेश होने वाला है। इस बीच केन्द्रीय कृषि मंत्री ने रणनीतिक सुझावों को एकत्रित करने के लिए किसानों तथा अन्य सम्बद्ध पक्षों के साथ व्यापक स्तर पर विचार-विमर्श आरंभ कर दिया है।

जब से शिवराज सिंह चौहान ने कृषि मंत्री का दायित्व संभाला है तब से वे इस क्षेत्र में नव जागरण लाने का प्रयास कर रहे हैं। कृषि तथा किसान कल्याण से जुड़े सभी आम एवं खास बिंदुओं पर उनकी गहरी नजर बनी हुई है।

उनकी सिफारिश पर ही खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में 20 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी हुई। कृषि क्षेत्र में अब भी अनेक सुधारों की सख्त जरूरत है जिस पर केन्द्रीय आम बजट में विशेष ध्यान देने की उम्मीद की जा रही है। 

कृषि क्षेत्र के संघों-संगठनों, उद्यमियों एवं उद्योग प्रतिनिधियों के साथ-साथ विशेषज्ञों तथा अर्थ शास्त्रियों के साथ भी कृषि मंत्री की बजट-पूर्व मीटिंग होती रही है।

वे इस क्षेत्र की चुनौतियों-समस्याओं को बारीकी से समझना चाहते हैं और इसमें संभावित सुधारों की स्पष्ट रूप रेखा बनाने का प्रयास कर रहे हैं।

केन्द्रीय वित्त मंत्रालय को सौंपे जाने वाले बजट प्रस्तावों को पूरी तरह तैयार एवं विकसित करने के लिए कृषि मंत्रालय में आंतरिक समीक्षा भी आरंभ हो चुकी है। इसमें सभी सुझावों को शामिल किया गया है जो मंत्रालय को समय-समय पर मिलता रहा है। 

केन्द्रीय आम बजट में कृषि मंत्रालय द्वारा दिए जाने वाले कुछ महत्वपूर्ण प्रस्तावों  पर प्राथमिकता के आधार पर ध्यान देने की आवश्यकता होगी।

इसमें कृषि में मूल्य संवर्धन के लिए व्यावहारिक एवं उपयोगी रणनीति का निर्माण, निर्यात सुविधाओं का विकास-विस्तार, कृषि क्षेत्र में अनुसंधान एवं विकास को प्रोत्साहन,

इनपुट की कीमतों को नियंत्रण में रखना तथा किसान संरक्षण उपायों को लागू करना आदि शामिल हैं। एक अन्य महत्वपर्ण बिंदु कृषि फसलों की उपज दर में सुधार से सम्बन्धित है।