क्रूड खनिज तेल के दाम में वृद्धि से रुपए की विनिमय दर पर दबाव बढ़ा

16-Jun-2025 12:27 PM

मुम्बई। ईरान-इजरायल के बीच भयंकर युद्ध के जारी रहने से अंतर्राष्ट्रीय बाजार में क्रूड खनिज तेल (पेट्रोलियम) एवं सोना-चांदी का भाव तेजी से उछलता जा रहा है जिससे भारतीय रुपए की विनिमय दर में काफी गिरावट आ गई है। इससे देश में विभिन्न वाणिज्यिक उत्पादों का आयात महंगा हो जाएगा और घरेलू प्रभाग में परिवहन खर्च में बढ़ोत्तरी भी होगी। भारतीय मुद्रा में 10 पैसे की नरमी आने से 1 अमरीकी डॉलर का मूल्य अब 86.18 रुपए के समतुल्य हो गया है। 13 जून को यह डॉलर 85.08 रुपए के बराबर था। एशिया के अन्य अधिकांश देशों की मुद्रा भी कमजोर रही जबकि डॉलर के सूचकांक में मामूली बदलाव देखा गया। 

ईरान-इजरायल युद्ध के कारण पेट्रोलियम के वैश्विक बाजार मूल्य में पिछले तीन चार दिनों के अंदर 12 प्रतिशत से अधिक की बढ़ोत्तरी हो गई। 16 जून को भी इसमें करीब 5 प्रतिशत का इजाफा दर्ज किया गया। ईरान और इजरायल एक-दूसरे पर भीषण बम बारी कर रहे हैं जिससे पश्चिम एशिया एवं मध्य पूर्व एशिया में तनाव चरम पर पहुंच गया है। इजरायल ने ईरान के परमाणु केन्द्रों के साथ-साथ तेल रिफाइनरीज पर भी घातक प्रहार किया है। हालांकि अमरीकी दबाव के कारण भारत में ईरान से पेट्रोलियम का आयात नहीं या नगण्य होता है मगर अंतर्राष्ट्रीय बाजार भाव बढ़ने का असर अन्य देशों पर भी पड़ेगा।  

जानकार सूत्रों के अनुसार अंतर्राष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड ऑयल का दाम 0.84 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 74.85 डॉलर प्रति बैरल तथा डब्ल्यूटीआई क्रूड तेल का भाव 1.03 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी के साथ आज सुबह 9 बजे 73.73 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। अधिकांश विश्लेषकों का मानना है कि यदि इन दोनों देशों के बीच लड़ाई जारी रही तो बहुत जल्द ब्रेंट क्रूड तेल का मूल्य 100 डॉलर प्रति बैरल से ऊपर पहुंच जाएगा और ऊंचे में इसके 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचने की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। यह स्थिति भारत के लिए ज्यादा नुकसानदायक साबित होगी जहां काफी जद्दोजहद के बाद खाद्य महंगाई काफी हद तक नियंत्रण में आई है। पेट्रोल-डीजल का दाम बढ़ने से परिवहन खर्च में इजाफा होगा और फिर सभी उत्पादों के दाम में दोबारा वृद्धि होने लगेगी।