कपास की उपज दर में बांग्ला देश ने भारत और पाकिस्तान को पीछे छोड़ा

08-Jul-2025 08:35 PM

ढाका। हालांकि बांग्ला देश में कपास की खेती सीमित क्षेत्रफल में होती है लेकिन इसकी उपज दर नियमित रूप से बढ़ती जा रही है। पाकिस्तान सरकार की आर्थिक सर्वेक्षण 2025 की रिपोर्ट में कहा गया है

कि बांग्ला देश में कपास की औसत उपज दर पाकिस्तान और भारत से ऊपर पहुंच गई है मगर वहां इसका बिजाई क्षेत्र सीमित रहने से कुल उत्पादन बहुत कम होता है। 

रिपोर्ट के अनुसार बांग्ला देश के सरकारी आंकड़ों से पता चलता है कि वहां कपास की औसत उत्पादकता दर उछलकर 734 किलो प्रति हेक्टेयर पर पहुंच गई है जो पाकिस्तान की औसत उपज दर 717 किलो प्रति हेक्टेयर तथा भारत की औसत उत्पादकता दर 436 किलो प्रति हेक्टेयर से ज्यादा है।

यह आंकड़ा न केवल हैरान करने वाला है बल्कि इस धारणा को गलत भी साबित करता है कि अधिक क्षेत्रफल में खेती होने पर उपज दर में ज्यादा वृद्धि होती है।

वैसे रूई के कुछ उत्पादन में भारत अपने दोनों पड़ोसी देशों से काफी आगे है और यदि यहां उपज दर पाकिस्तान या बांग्ला देश के समकक्ष पहुंच जाए तो कपास के उत्पादन में और भी जोरदार इजाफा हो सकता है।  

बांग्ला देश में कपास की खेती के लिए आधुनिक विधि का इस्तेमाल किया जा रहा है और फसल प्रबंधन के लिए काफी निवेश किया गया है।

वहां कपास की फसल पर कीड़ों-रोगों के आघात को नियंत्रित करने के लिए बेहतर विधि अपनाई जाती है जिससे फसल को न्यूनतम नुकसान होता है।

दूसरी ओर पाकिस्तान और भारत को कीट नियंत्रण के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ रहा है। वहां बीज की क्वालिटी की भी समस्या है। ऐसा प्रतीत होता है कि बांग्ला देश ने सीमित संसाधनों का अधिकतम इस्तेमाल करने तथा जीतने का फार्मूला खोज लिया है।

भारत और पाकिस्तान को भी इस फार्मूले की जरूरत है ताकि अधिक से अधिक उत्पादन हासिल करने और रूई की गुणवत्ता को उच्च स्तर तक ले जाने में सफलता मिल सके।