कपास का उत्पादन घटने की संभावना से टेक्सटाइल क्षेत्र की चिंता बढ़ी
21-Nov-2024 03:10 PM
अहमदाबाद । बिजाई क्षेत्र में भारी कमी आने तथा कुछ क्षेत्रों में प्राकृतिक आपदाओं से फसल को क्षति होने के कारण 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के लिए कपास के घरेलू उत्पादन अनुमान में लगातार हो रही कटौती से टेक्सटाइल क्षेत्र (वस्त्र उद्योग) काफी चिंतित हो गया है।
संघों-संगठनों द्वारा इस बार कपास का उत्पादन घटकर 302 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) के आसपास सिमट जाने का अनुमान लगाया जा रहा है।
देश के सबसे प्रमुख रूई उत्पादक प्रान्त- गुजरात में कपास का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष के 26.82 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार 23.71 लाख हेक्टेयर पर अटक गया।
उद्योग विश्लेषकों के अनुसार कपास (रूई) की उपज दर बढ़ाने के लिए नई-नई उन्नत एवं हाइब्रिड किस्मों के बीज का प्रचलन बढ़ाए जाने की सख्त जरूरत है।
गुजरात में जिनिंग एवं स्पिनिंग क्षेत्र में बुनियादी ढांचे का तेजी से विकास विस्तार हुआ है और उसके लिए कच्चे माल (कपास) की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने हेतु उत्पादन में अपेक्षित इजाफा होना आवश्यक है।
राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि गुजरात में कपास का क्षेत्रफल वर्ष 2022 के 25.49 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2023 में 26.82 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा मगर 2024 में घटकर 23.71 लाख हेक्टेयर रह गया। वहां कपास की फसल पर रोगों-कीड़ों का प्रकोप भी रहता है जिससे रूई की उपज दर में कमी आ जाती है।
मंडियों में रूई की आवक भी प्रभावित होती रही है। इस बार बेहतर आमदनी प्राप्त करने के उद्देश्य से गुजरात के अनेक किसानों द्वारा कपास के बजाए मूंगफली की खेती को प्राथमिकता दी गई है जिससे रूई का उत्पादन घटने की संभावना है। मूंगफली का बिजाई क्षेत्र गत वर्ष के 16.35 लाख हेक्टेयर से बढ़कर इस बार 19.08 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।
उद्योग समीक्षकों के अनुसार पिछले कुछ वर्षों से राज्य में कपास की औसत उपज दर में गिरावट का माहौल बना हुआ है जबकि इस बार बिजाई क्षेत्र में भी 3 लाख हेक्टेयर की गिरावट आ गई है।
कॉटन एसोसिएशन ऑफ इंडिया ने कपास का घरेलू उत्पादन 2023-24 सीजन के 325 लाख गांठ से घटकर 2024-25 के वर्तमान सीजन में 302 लाख गांठ के करीब सिमट जाने का अनुमान लगाया है जो हाल के वर्षों का सबसे निचला उत्पादन स्तर है। गुजरात में इस अवधि में कपास का प्रेसिंग 90 लाख गांठ से गिरकर 80 लाख गांठ के आसपास सिमट जाने का अनुमान है।
