कपास का उत्पादन घटने से किसानों को मिलेगी कम आमदनी

05-Jan-2026 01:54 PM

मुम्बई। वर्ष 2024-25 के मुकाबले 2025-26 के मौजूदा मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के दौरान कपास का घरेलू उत्पादन 1.7 प्रतिशत गिरकर 292 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) पर सिमट जाने का अनुमान है जो पिछले एक दशक का सबसे छोटा उत्पादन होगा।

इसके साथ-साथ कपास का थोक  मंडी भाव भी न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) से नीचे चल रहा है। इससे उत्पादकों की आमदनी घट जाएगी और अगले सीजन में इसकी खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षण कम हो सकता है। 

एक अग्रणी रेटिंग एजेंसी के अनुसार बिजाई क्षेत्र में कमी आने, बारिश की अधिकता से खेतों में लम्बे समय तक पानी का जमाव रहने तथा कहीं-कहीं कीड़ों- रोगों का प्रकोप होने से कपास के उत्पादन में गिरावट आ गई।

कई इलाकों में किसानों द्वारा अन्य लाभप्रद फसलों की खेती को प्राथमिकता दिए जाने से कपास की बिजाई घट गई। 

हालांकि केन्द्रीय कपड़ा मंत्रालय की अधीनस्थ एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) द्वारा तेलंगाना, महाराष्ट्र, गुजरात, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, पंजाब, हरियाणा एवं राजस्थान जैसे शीर्ष उत्पादक प्रांतों में न्यूनतम समर्थन मूल्य पर किसानों से कपास की खरीद की जा रही है

लेकिन दूर-दर्ज के क्षेत्रों में उत्पादकों को काफी नीचे दाम पर अपना उत्पाद बेचने के लिए विवश होना पड़ रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्र की अर्थ व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका है। 

रेटिंग एजेंसी के मुताबिक यद्यपि पिछले साल की तुलना में चालू सीजन के दौरान कपास की औसत उपज दर में 1.8 प्रतिशत की मामूली बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है

मगर बिजाई क्षेत्र में आई भारी गिरावट के कारण कुल पैदावार कम होगी। कपास का क्षेत्रफल वर्ष 2021 के शीर्ष स्तर की तुलना में वर्ष 2025 के दौरान करीब 20 प्रतिशत घट गया।  

कपास की कम पैदावार की संभावना को देखते हुए केन्द्र सरकार ने अगस्त 2025 में रूई के आयात को 31 दिसम्बर 2025 तक के लिए 11 प्रतिशत के सीमा शुल्क से मुक्त कर दिया था और 1 जनवरी 2026 से वह शुल्क पुनः लागू हो गया है।