कपास खरीद के मामले पर तेलंगाना सरकार की आलोचना
08-Oct-2025 08:30 PM
हैदराबाद। दक्षिणी भारत के सबसे प्रमुख रूई उत्पादक राज्य- तेलंगाना में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर कपास की खरीद आरंभ करने को लेकर सरकारी एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) तथा राज्य के जिनिंग मिलर्स के बीच गतिरोध बना हुआ है लेकिन इस बीच केन्द्रीय कपड़ा मंत्री ने तेलंगाना सरकार की आलोचना करते हुए उस पर अपनी जिम्मेदारी से बचने तथा मामले का राजनीतिकरण करने का आरोप लगा दिया है।
कपड़ा मंत्री का कहना है कि भारतीय कपास निगम तेलंगाना में कपास फसल की सम्पूर्ण मात्रा खरीदने के लिए तैयार है लेकिन इसकी निर्बाध खरीद सुनिश्चित करने के लिए राज्य सरकार अपनी भूमिका निभाने में विफल रही है। इससे वहां किसानों को कठिनाई हो रही है।
कृषि क्षेत्र राज्यों के न्यायिक अधिकार क्षेत्र के अंतर्गत आता है। केन्द्र सरकार अन्य उत्पादक राज्यों की भांति तेलंगाना में भी भारतीय कपास निगम के माध्यम से कपास की प्रत्येक गांठ खरीदने के लिए तैयार और प्रतिबद्ध है लेकिन वहां राज्य सरकार इतनी हठी हो गई है कि उसने किसानों के हित में कार्य करने से इंकार कर दिया।
वह किसानों को बेहतर बीज की आपूर्ति क्यों नहीं सुनिश्चित करती है और प्रभावी ढंग से कपास की खरीद के लिए आवश्यक बुनियादी ढांचे का निर्माण क्यों नहीं करती ? कपड़ा मंत्री ने तेलंगाना सरकार पर आरोप लगाया कि वह रोजगार गारंटी योजना के अंतर्गत प्राप्त राशि का दुरूपयोग कर रही है और कपास क्षेत्र की अनदेखी भी कर रही है।
कपड़ा मंत्री के अनुसार तेलंगाना में लगभग 20 लाख किसानों द्वारा करीब 18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में कपास की खेती की गई है। वहां उत्पादित कपास के लगभग 80 प्रतिशत भाग की खरीद केन्द्रीय एजेंसी- भारतीय कपास निगम के माध्यम से की जाती है।
कपड़ा मंत्री ने राज्य सरकार से कपास उत्पादकों के लिए फील्ड स्तर पर सहयोग-समर्थन बढ़ाने का आग्रह करते हुए कहा कि केन्द्र सरकार ने कपास की बिक्री को सुविधाजनक बनाने के लिए एक ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन एप आरंभ किया है।
गत वर्ष तेलंगाना में कपास की खरीद के लिए 110 क्रय केन्द्र क्रियाशील थे जबकि चालू वर्ष के दौरान इसकी संख्या 122 तक बढ़ा दी गई है। शीघ्र ही राज्य में कपास की सरकारी खरीद आरंभ होने वाली है।
