कर्नाटका में फसल के बर्बाद होने से तुवर की पैदावार घटने की संभावना

06-Dec-2024 05:57 PM

नई दिल्ली । केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने अपने प्रथम अग्रिम अनुमान में तुवर का घरेलू उत्पादन 2023-24 सीजन के 34.17 लाख टन से 85 हजार टन बढ़कर 2024-25 के वर्तमान सीजन में 35.02 लाख हेक्टेयर पर पहुंचने की संभावना व्यक्त की है।

दरअसल नवम्बर के पहले सप्ताह में जब कृषि मंत्रालय का यह उत्पादन अनुमान जारी हुआ था तब कर्नाटक में तुवर की फसल काफी उत्साहवर्धक स्थिति में थी और ऐसा लग रहा था कि इस बार राज्य में अरहर का बम्पर उत्पादन होगा और यह सरकारी अनुमान से भी आगे निकल  जाएगा। लेकिन उसके बाद हालात बदल गए। 

कर्नाटक में कलबुर्गी तुवर का सबसे प्रमुख उत्पादक जिला है जहां वर्ष 2024 के खरीफ सीजन में इस महत्वपूर्ण दलहन फसल का बिजाई क्षेत्र बढ़कर 6.22 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।

मध्य नवम्बर तक फसल की हालत भी ठीक रही मगर उसके बाद फसल पर कीड़ों-रोगों का आघात तेजी से बढ़ने लगा और देखते ही देखते विशाल क्षेत्रफल में फैल गया।

मोटे अनुमान के अनुसार कलबुर्गी जिले में लगभग 2 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में तुवर की फसल अब बिल्ट रोग से प्रभावित हो चुकी है जिससे इसे भारी नुकसान हुआ है।

कलबुर्गी जिले के कुछ गांवों में तो तुवर की फसल पूरी तरह चौपट हो गई है जबकि अन्य क्षेत्रों में भी इसे 75 से 100 प्रतिशत तक की क्षति होने की आशंका है। 

राष्ट्रीय स्तर पर अरहर का बिजाई क्षेत्र इस वर्ष बढ़कर 46.55 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया जो पिछले साल के क्षेत्रफल 40.74 लाख हेक्टेयर से 5.81 लाख हेक्टेयर ज्यादा था।

रकबे में हुई भारी बढ़ोत्तरी से तुवर काफी बढ़ने की उम्मीद की जा रही थी मगर फसल की प्रगति के चरण में भारी वर्षा, बाढ़ एवं खेतों में जल जमाव का संकट रहा।

इसे देखते हुए कृषि मंत्रालय ने व्यावहारिक रुख अपनाते हुए तुवर के उत्पादन में केवल 85 हजार टन की बढ़ोत्तरी का अनुमान लगाया लेकिन अब प्रतीत होता है कि वास्तविक उत्पादन इस अनुमान से भी कम हो सकता है। कर्नाटक एवं महाराष्ट्र में बिजाई क्षेत्र में अच्छी वृद्धि हुई थी।