कर्नाटक में सुपारी उत्पादकों को नुकसान का उचित मुआवजा देने का आश्वासन

22-Aug-2025 01:14 PM

नई दिल्ली। सुपारी के सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य- कर्नाटक में घातक बीमारी से फसल को हुए भारी नुकसान की सूचना मिलने पर केन्द्रीय कृषि मंत्री की अध्यक्षता में एक उच्चस्तरीय बैठक की गई जिसमें केन्द्रीय मंत्री, केन्द्रीय राज्य मंत्री तथा कर्नाटक के प्रमुख सुपारी उत्पादक क्षेत्रों के मंत्रियों एवं सांसद ने भाग लिया।

केन्द्रीय कृषि मंत्री ने कृषि वैज्ञानिकों को इस मुद्दे पर जल्दी से जल्दी रिसर्च रिपोर्ट जमा करने का निर्देश दिया कि सुपारी गैर कार्सिनोजेनिक है या नहीं। केन्द्रीय कृषि मंत्री ने बैठक में कहा कि घातक बीमारी के कारण सुपारी उत्पादकों को जो नुकसान हुआ है उसका उचित मुआवजा दिया जाएगा। 

कृषि मंत्री का कहना था कि सुपारी उत्पादकों के हितों को पूरी सुरक्षा की जाएगी और वे स्वयं स्थिति का आंकलन करने के लिए कर्नाटक का दौरा करेंगी। इस बैठक में भारी उद्योग मंत्री तथा खाद्य मंत्री (दोनों कर्नाटक के हैं), कर्नाटक के मंत्री, सांसद तथा वरिष्ठ अधिकारी आदि उपस्थित थे।

इस मिटिंग में सुपारी से सम्बन्धित अनेक मुद्दों पर गहन विचार-विमर्श किया गया और विभिन्न समस्याओं को सुलझाने के उपायों पर चर्चा की गई। ध्यान देने की बात है कि कर्नाटक सुपारी का सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है और कुछ राष्ट्रीय उत्पादन में इसका योगदान 50 प्रतिशत से ज्यादा रहता है। 

केन्द्रीय कृषि मंत्री ने विश्व स्वास्थ्य संगठन की एक रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि इस रिपोर्ट से कर्नाटक में उत्पादित होने वाली सुपारी के बारे में कुछ भ्रम की स्थिति उत्पन्न हो गई है।

इस गलत धारणा को दूर करने के लिए भारतिय कृषि अनुसन्धान परिषद के वैज्ञानिको का एक दल गहन अध्ययन अभियान संचालित कर रहा है और उसे एक निर्धारित समय सीमा के भीतर अपनी रिपोर्ट जमा करने के लिए कहा गया है।

कर्नाटक में 2023-24 सीजन के दौरान 10.32 लाख टन सुपारी का उत्पादन हुआ था जबकि राष्ट्रीय स्तर पर इसका कुल उत्पादन 14.11 लाख टन दर्ज किया गया था।

कर्नाटक में सुपारी का उत्पादन मुख्यतः दक्षिण कन्नड़, उडुपी, चिकमगलूर, शिवमोगा, उत्तरी कन्नड़, दावणगेरे, टुंकुर तथा कोडागू जैसे जिलों में होता है। वर्षा फ्रूटरोट रोग का भयंकर प्रकोप देखा जा रहा है।