कृषि एवं ग्रामीण विकास के लिए वित्त मंत्री को लेना होगा बोल्ड निर्णय
23-Jan-2025 06:20 PM
नई दिल्ली । केन्द्रीय वित्त मंत्री को वर्ष 2025-26 के आम बजट में कृषि एवं ग्रामीण विकास के लिए कुछ बोल्ड निर्णय लेना पड़ेगा क्योंकि अनेक चुनौतियों एवं समस्यों के कारण इसकी सख्त आवश्यकता महसूस की जा रही है।
यद्यपि कृषि कार्य पूरे वर्ष तक चलने वाला व्यवसाय है और कृषि क्षेत्र पर किए जाने वाले कुछ महत्वपूर्ण निर्णय राज्य सरकार के अधिकार क्षेत्र में आते हैं लेकिन केन्द्र सरकार के फैसले का दायरा भी बहुत विशाल है।
केन्द्रीय आम बजट से राज्यों को भी कृषि क्षेत्र के लिए अपनी नीतियां एवं योजना बनाने की दिशा प्राप्त होती है। भारत एक कृषि प्रधान देश है और यदि उसे संसार की तीसरी या चौथी सबसे बड़ी अर्थ व्यवस्था वाला देश बनना है तो कृषि क्षेत्र का विकसित एवं आधुनिक होना परम आवश्यक है।
देश में खरीफ एवं रबी सीजन को मिलाकर लगभग 17 करोड़ हेक्टेयर में प्रमुख कृषि फसलों की खेती होती है जिसमें धान, गेहूं, मोटे अनाज, दलहन, तिलहन, कपास, गन्ना एवं जूट आदि शामिल हैं।
इतने विशाल क्षेत्रफल में खेती होने के बावजूद उत्पादन अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच रहा है क्योंकि औसत उपज दर बहुत नीचे रहती है।
सरकार का ध्यान अभी तक न्यूनतम समर्थन मूल्य में भारी वृद्धि के जरिए उत्पादन बढ़ाने पर केन्द्रित रहा है। लेकिन अब समय आ गया है कि तमाम लाभकारी स्कीमों को जारी रखते हुए उत्पादकता में बढ़ोत्तरी पर विशेष ध्यान दिया जाए। दलहन-तिलहन क्षेत्र पर खास ध्यान दिए जाने की आवश्यकता है
क्योंकि इसका उत्पादन अपर्याप्त होने के कारण विदेशों से विशाल मात्रा में दलहनों एवं खाद्य तेलों का आयात करने की आवश्यकता पड़ती है।
इस पर भारी-भरकम बहुमूल्य विदेशी मुद्रा खर्च होती है। पिछले साल के आरंभ में केन्द्रीय सहकारिता मंत्री ने कहा था कि वर्ष 2027 के अंत तक भारत दलहन उत्पादन पूरी तरह आत्मनिर्भर हो जाएगा और वर्ष 2028 से के किलो दलहन के भी आयात की जरूरत नहीं पड़ेगी। इस महत्वकांक्षी लक्ष्य को हासिल कर दिया गया है।
खाद्य तेलों के आयात में 5-7 लाख टन की घटबढ़ रहती है मगर इसका वार्षिक स्तर 140-145 लाख टन से ऊपर ही रहता है।
इससे साफ संकेत मिलता है कि दलहन-तिलहन का उत्पादन एक निश्चित सीमा में लगभग स्थिर हो गया है और केवल एमएसपी के सहारे इसमें अपेक्षित बढ़ोत्तरी करना संभव नहीं है। इसके लिए बजट में ठोस प्रस्ताव लाना तथा धनराशि का आवंटन भी आवश्यक है।
