कृषि उत्पादों की सरकारी खरीद में चावल- गेहूं की सर्वाधिक भागीदारी

05-Jun-2025 08:14 PM

नई दिल्ली। यद्यपि केन्द्र की अधीनस्थ एजेंसियों द्वारा किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) पर दलहन, तिलहन और कपास की खरीद की जाती है लेकिन यह तभी होता है जब इन जिंसों का भाव घटकर (एमएसपी) से नीचे आता है।

दूसरी ओर धान (चावल) एवं गेहूं की विशाल खरीद प्रत्येक वर्ष अनिवार्य रूप से की जाती है जो अन्य जिंसों की तुलना में बहुत अधिक होती है।

चूंकि एमएसपी पर धान और गेहूं की सरकारी खरीद की गारंटी रहती है इसलिए इसकी खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षण बरकरार रहता है। 

केन्द्र सरकार ने एक बार फिर 2025-26 सीजन के लिए खरीफ फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में बढ़ोत्तरी की घोषणा की है।

इसके तहत सबसे कम वृद्धि धान के एमएसपी में हुई है जबकि दलहन-तिलहन फसलों के साथ-साथ मोटे अनाजों का समर्थन मूल्य भी काफी ज्यादा बढ़ाया गया  है।

लेकिन इसके बावजूद धान के उत्पादन क्षेत्र में कम से कम एमएसपी के आधार पर गिरावट आने की आशंका नहीं है। धान की फसल को पानी की ज्यादा जरूरत पड़ती है और पंजाब जैसे राज्यों में पानी का अभाव होने लगा है।

सरकार वहां धान का रकबा घटाना चाहती है मगर किसान इसके लिए तैयार नहीं है। इसका एक मात्र मूल कारण यही है कि किसानों को अपने उत्पादन का तमाम अधिशेष स्टॉक समर्थन मूल्य पर बिकने का भरोसा रहता है।

गेहूं का मामला भी ऐसा ही है। नतीजा यह है कि पंजाब पिछले अनेक वर्षों से केन्द्रीय पूल में खाद्यान्न (चावल एवं गेहूं) का सर्वाधिक योगदान देने वाला राज्य बना हुआ है। 

अन्य जिंसों का भाव बाजारी शक्तियों पर निर्भर रहता है। अत्यन्त आवश्यक होने पर ही इसकी सरकारी खरीद होती है और वह भी सीमित मात्रा में। इससे अधिकांश किसान अपने उत्पाद का लाभप्रद मूल्य प्राप्त करने से वंचित रह जाते हैं।