कॉटन टेक्टाइल उद्योग की बेहतरी के लिए सरकार प्रयत्नशील

21-Jul-2026 05:51 PM

नई दिल्ली। भारत दुनिया में कपास के बिजाई क्षेत्र की दृष्टि से प्रथम स्थान पर तथा रूई के उत्पादन एवं उपयोग की दृष्टि से चीन के बाद दूसरे नंबर पर रहता है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2025-26 सीजन के दौरान देश में 290.91 लाख गांठ कपास का उत्पादन हुआ। जबकि इसका कुल उपयोग बढ़कर 328 लाख गांठ (170 किलो की प्रत्येक गांठ) पर पहुंचने की उम्मीद है। रूई के सकल वैश्विक उत्पादन में भारत का योगदान 19 प्रतिशत के करीब रहता है।

केन्द्र सरकार स्वदेशी कॉटन टैक्सटाइल उद्योग की बेहतरी एवं उन्नति प्रगति के प्रति सदा प्रयत्नशील रहती है। रूई के आयात पर लगे 11 प्रतिशत के सीमा शुल्क को जून से अक्टूबर 2026 तक की अवधि के लिए स्थगित कर दिया गया जिससे उद्योग को कुछ राहत मिल रही है। 

कपास के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में पिछले तीन वर्षों से जबरदस्त इजाफा हो रहा है जिससे किसानों को आर्थिक लाभ मिल रहा है। बाजार भाव नीचे आने पर सरकारी एजेंसी- भारतीय कपास निगम (सीसीआई) द्वारा तमाम प्रमुख उत्पादक राज्यों में किसानों से एमएसपी पर भारी मात्रा में कपास की खरीद की जाती है।

इसी तरह सरकार ने कपास उत्पादकता मिशन आरंभ किया है जिसका उद्देश्य वर्ष 2031 तक देश में रूई का सालाना उत्पादन बढ़ाकर 498 लाख गांठ पर पहुंचाना है। रूई की औसत उपज दर बढ़ाने तथा गुणवत्ता में सुधार लाने के लिए नई-नई तकनीक का प्रयोग किया जा रहा है। किसानों को उत्पादन बढ़ाने के लिए निरन्तर सहयोग-समर्थन एवं प्रोत्साहन दिया जा रहा है। 

लेकिन मौसम एवं मानसून की हालत अनुकूल नहीं होने से चालू खरीफ सीजन के दौरान कपास का घरेलू उत्पादन क्षेत्र घटकर 92.53 लाख हेक्टेयर रह गया है जो पिछले साल की इसी अवधि के बिजाई क्षेत्र 98.40 लाख हेक्टेयर से 5.87 लाख हेक्टेयर कम है। हालांकि तेलंगाना एवं आंध्र प्रदेश में कपास का रकबा बढ़ा है मगर गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, पंजाब एवं हरियाणा जैसे प्रांतों में बिजाई क्षेत्र में काफी कमी आई है। यदि क्षेत्रफल में गिरावट का यह अंतर बना रहा तो रूई का उत्पादन घट सकता है।