खरीफ फसलों के भंडारण हेतु पंजाब से 10 लाख टन चावल की निकासी

16-Jun-2025 08:21 PM

चंडीगढ़। यद्यपि केन्द्रीय पूल में खाद्यान्न का सर्वाधिक योगदान देने वाले राज्य- पंजाब में रबी कालीन गेहूं की सरकारी खरीद पहले ही बंद हो चुकी है मगर भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) की व्यस्तता अभी खत्म नहीं हुई है। एक तरफ इसे गेहूं के सुरक्षित भंडारण का प्रबंध करना पड़ रहा है और राइस मिलर्स से चावल की आपूर्ति स्वीकार करनी पड़ रही है

तो दूसरी ओर आगामी खरीफ मार्केटिंग सीजन में खरीदे जाने वाले धान से निर्मित चावल के भंडार के लिए गोदामों / वेयर हाउस को खाली भी करना पड़ रहा है। इसके लिए पंजाब के गोदामों से चावल के स्टॉक को बाहर निकाल कर उसे दूसरे राज्य में भेजा जा रहा है।  

उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार मई 2025 के दौरान पंजाब से 10 लाख टन चावल के स्टॉक को देश के दूसरे राज्यों में डिस्पैच किया गया जबकि जून 2025 में अन्य 14 लाख टन का स्टॉक दूसरे राज्यों में स्थानांतरित किए जाने का प्लान है।

खाद्य निगम अक्टूबर 2025 में नया खरीफ मार्केटिंग सीजन आरंभ होने से पूर्व पंजाब के गोदामों को अधिक से अधिक खाली करने हेतु प्रयासरत हैं ताकि आगामी सीजन में जब कस्टम मिल्ड राईस (सीएमआर) की आपूर्ति शुरू हो तो उसके सुरक्षित भंडारण में ज्यादा कठिनाई उत्पन्न न हो और गोदामों में पर्याप्त जगह मौजूद रहे। 

भारतीय खाद्य निगम के पंजाब रीजन के महाप्रबन्धक का कहना है कि गोदामों में पर्याप्त खाली जगह की व्यवस्था सुनिश्चित की जा रही है ताकि जब चावल की आगामी सीजन वाली खेपों की आपूर्ति शुरू हो तो उसका सुरक्षित भंडारण सुनिश्चित हो सके।

आमतौर पर राइस मिलर्स खाद्य निगम को दिसम्बर से चावल की आपूर्ति शुरू कर देते हैं। दिसम्बर 2025 तक अप्रैल माह पंजाब के गोदामों से 8-10 लाख टन चावल का स्टॉक अन्य राज्यों में पहुंचाने का प्लान बनाया गया है। 

2024-25 के खरीफ मार्केटिंग सीजन में खाद्य निगम द्वारा पंजाब में किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य पर धान की जितनी खरीद करके राइस मिलर्स को आवंटित किया गया उसमें से 96 लाख टन चावल अब तक उसे प्राप्त हो चुका है जो कुल प्राप्ति योग्य मात्रा का 82 प्रतिशत है।

दरअसल मिलर्स तो और अधिक मात्रा में चावल की डिलीवरी देने के लिए तैयार है मगर स्थान का अभाव होने के कारण खाद्य निगम के अधिकारी इसकी डिलीवरी प्राप्त करने में सुस्ती दिखा रहे हैं। गोदामों में जगह खाली होने पर चावल की शेष 18 प्रतिशत मात्रा की आपूर्ति को स्वीकार कर लिया जाएगा।