खरीफ फसलों की बिजाई में गत वर्ष के मुकाबले घट-बढ़ रही

08-Oct-2025 01:47 PM

नई दिल्ली। पिछले साल के मुकाबले इस वर्ष खरीफ फसलों का उत्पादन क्षेत्र 1114.95 लाख हेक्टेयर से 6.51 लाख हेक्टेयर बढ़कर 1121.46 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो सामान्य औसत क्षेत्रफल 1096.65 लाख हेक्टेयर से काफी अधिक है।

सर्वकालीन अवधि के दौरान धान, उड़द, मक्का एवं गन्ना के उत्पादन क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई मगर सोयाबीन, मूंगफली तथा कपास का बिजाई क्षेत्र घट गया। तिल का रकबा पीछे रहा मगर अरंडी का क्षेत्रफल बढ़ गया। अन्य खरीफ फसलों ज्वार, बाजरा, रागी, तुवर, मूंग, मोठ एवं सूरजमुखी आदि के उत्पादन क्षेत्र में मामूली घट-बढ़ देखी गई। 

गत वर्ष के मुकाबले इस बार धान का उत्पादन क्षेत्र 435.68 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 441.58 लाख हेक्टेयर, उड़द का बिजाई क्षेत्र 22.87 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 24.37 लाख हेक्टेयर, मक्का का क्षेत्रफल 84.30 लाख हेक्टेयर से उछलकर 94.95 लाख हेक्टेयर तथा गन्ना का रकबा 57.22 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 59.07 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा।

दूसरी ओर सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र इसी अवधि में 129.55 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 120.45 लाख हेक्टेयर, कपास का बिजाई क्षेत्र 112.97 लाख हेक्टेयर से घटकर 110.03 लाख हेक्टेयर तथा मूंगफली का क्षेत्रफल 49.96 लाख हेक्टेयर से गिरकर 48.36 लाख हेक्टेयर पर सिमट गया। अन्य खरीफ फसलों के रकबे में भी थोड़ा- बहुत उतार-चढ़ाव देखा गया। 

दक्षिण-पश्चिम मानसून की बारिश 1 जून से 30 सितम्बर 2025 के दौरान दीर्घकालीन औसत की तुलना में 8 प्रतिशत अधिक हुई। इस वर्ष पश्चिमोत्तर भारत तथा मध्य पश्चिमी क्षेत्र में अत्यन्त जोरदार बारिश हुई।

इस अवधि के दौरान दक्षिण भारत के प्रायद्वीपीय क्षेत्र में भी सामान्य औसत से करीब 7 प्रतिशत अधिक वर्षा हुई मगर पूर्वी एवं पूर्वोत्तर प्रांतों में 20 प्रतिशत कम बारिश दर्ज की गई। 

वर्षा के असमान वितरण से कुछ क्षेत्रों में खरीफ फसलों को नुकसान  हुआ है और वहां उत्पादन घटने की आशंका है। अन्य इलाकों में फसलों की हालत संतोषजनक बताई जा रही है।

मंडियों में नए माल की आवक होने लगी है जबकि आगामी समय में इसकी रफ्तार क्रमिक रूप से तेज होती जाएगी। दलहन-तिलहन फसलों की हालत पर नजर रखने की आवश्यकता है।