खरीफ फसलों की जोरदार बिजाई

12-Jul-2025 11:52 AM

देश के तीन भाग में लहराते तीन समंदर- पूरब में बंगाल की खाड़ी, पश्चिम में अरब सागर और दक्षिण में हिन्द महासागर के साथ-साथ अंडमान सागर में भी परिस्थितियां अनुकूल होने से दक्षिण-पश्चिम मानसून इस बार अधिकांश राज्यों को भरपूर बारिश की सौगत बांट रहा है जिससे भारतीय किसानों को खरीफ फसलों की बिजाई की रफ्तार एवं दायरा बढ़ाने में अच्छी सफलता मिल रही है।

यह सही है कि भारत अत्यन्त विशाल देश है और इसके सम्पूर्ण परिक्षेत्र में समान बारिश नहीं होती है। प्रत्येक वर्ष देश का कुछ भाग सूखे की चपेट में रहता है तो कुछ अन्य हिस्सा बाढ़ का संकट झेलता है।

इस बार भी हालत कुछ ऐसी ही है। बिहार, आसाम, तेलंगाना, आंध्र प्रदेश एवं कर्नाटक सहित कुछ अन्य प्रांतों के अनेक जिलों में मानसून की बारिश अभी तक सामान्य औसत से कम या बहुत कम हुई है और इसलिए वहां बिजाई की रफ्तार काफी धीमी है।

दूसरी ओर मध्य प्रदेश, राजस्थान एवं गुजरात जैसे राज्यों के कुछ जिलों में अत्यन्त भारी वर्षा होने के कारण खेतों में पानी भर गया है जिसमें धान को छोड़कर अन्य फसलों की बिजाई संभव नहीं है।

ऐसा प्रत्येक साल होता है इसलिए यह कोई अप्रत्याशित घटना नहीं है। लेकिन कुल मिलाकर मानसून की हालत इस वर्ष बेहतर देखी जा रही है।

मौसम विभाग के मुताबिक जुलाई में सामान्य औसत से 15 प्रतिशत अधिक वर्षा हो चुकी है जबकि महीने का दो-तिहाई भाग अभी बाकी है।

देश से सबसे ज्यादा वर्षा जुलाई में ही होती है इसलिए जिन इलाकों में अभी  बारिश की कमी महसूस की जा रही है वहां आगामी दिनों में मानसून के सक्रिय होने की संभावना बनी हुई है।

मानसून की बेहतर बारिश के सहारे बांधों-जलाशयों में पानी का स्तर बढ़कर 51 प्रतिशत से ऊपर पहुंच गया है जबकि आगे इसमें और बढ़ोत्तरी होने की उम्मीद है। इससे खासकर आगामी रबी सीजन में फसलों की सिंचाई के लिए पानी का ज्यादा स्टॉक उपलब्ध हो सकता है।  

देश भर में खरीफ फसलों की जोरदार बिजाई हो रही है और इसका उत्पादन क्षेत्र पंचवर्षीय औसत के 40 प्रतिशत से ऊपर पहुंच चुका है। 4 जुलाई वाले सप्ताह के दौरान लगभग 180 लाख हेक्टेयर अतिरिक्त क्षेत्र में खरीफ फसलों की बिजाई हुई।

चालू सप्ताह में भी रकबा तेजी से बढ़ने के आसार हैं क्योंकि अनेक राज्यों में मानसून की सक्रियता बरकरार है। जुलाई-अगस्त में खरीफ फसलों की सर्वाधिक बिजाई होती है।

इस बार बिजाई का पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 1097 लाख हेक्टेयर आंका गया है जिसमें से 430 लाख हेक्टेयर से ज्यादा क्षेत्र में पहले ही खेती हो चुकी है। मानसून की बारिश जैसे-जैसे नए-नए क्षेत्रों में पहुंचती जाएगी वैसे-वैसे खरीफ फसलों का रकबा भी बढ़ता जाएगा।

उम्मीद है कि चालू वर्ष के दौरान बिजाई क्षेत्र में बढ़ोत्तरी होने तथा मौसम एवं मानसून की हालत अनुकूल रहने पर एक बार फिर खरीफ फसलों का शानदार घरेलू उत्पादन होगा और खाद्य महंगाई में कमी आएगी।