खरीफ फसलों के क्षेत्रफल में बढ़ोत्तरी का सिलसिला जारी रहने की उम्मीद

10-Jul-2025 05:46 PM

नई दिल्ली। पिछले साल की तुलना में चालू वर्ष के दौरान 4 जुलाई तक खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 393.77 लाख हेक्टेयर से 11 प्रतिशत बढ़कर 437.43 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया।

एक सप्ताह के दरम्यान इसके क्षेत्रफल में करीब 180 लाख हेक्टेयर का इजाफा हो गया जिसमें तिलहन फसलों के रकबा का योगदान 60 लाख हेक्टेयर के करीब रहा।

इस वर्ष खरीफ फसलों के लिए सामान्य औसत क्षेत्रफल 1097 लाख हेक्टेयर आंका गया है जिसके 40 प्रतिशत भाग में फसलों की बिजाई पूरी हो चुकी है। 

देश के विभिन्न भागों में मानसून की अच्छी बारिश हो रही है जिससे किसानों को बिजाई की रफ्तार बढ़ाने में सहायता मिल रही है। पिछले साल के मुकाबले इस बार अरहर (तुवर), मक्का एवं रागी की खेती कुछ कम क्षेत्रफल में हुई है जबकि अन्य फसलों का रकबा गत वर्ष से आगे चल रहा है।

उम्मीद की जा रही है कि तुवर, मक्का एवं रागी का उत्पादन क्षेत्र चालू सप्ताह के दौरान बढ़ेगा और यह पिछले साल से आगे निकल सकता है।

हालांकि तुवर का घरेलू बाजार भाव अपने शीर्ष स्तर की तुलना में अब काफी घटकर न्यूनतम समर्थन मूल्य के आसपास और कहीं-कहीं उससे भी नीचे आ गया है लेकिन केन्द्र सरकार ने तुवर का न केवल न्यूनतम समर्थन मूल्य 7550 रुपए प्रति क्विंटल से 450 रुपए बढ़ाकर 8000 रुपए प्रति क्विंटल निर्धारित किया है बल्कि इस मूल्य पर किसानों से अरहर की 100 प्रतिशत खरीद करने की गारंटी भी दी है।

इससे उत्पादकों का उत्साह बढ़ सकता है। मौसम एवं वर्षा की हालत अनुकूल रहने पर किसान इस महत्वपूर्ण दलहन की खेती में अच्छी दिलचस्पी दिखा सकते हैं। कर्नाटक में क्षेत्रफल पहले ही बढ़ चुका है। 

जहां तक मक्का की बात है तो इसका न्यूनतम समर्थन मूल्य भी 2225 रुपए प्रति क्विंटल से 175 रुपए बढ़ाकर 2400 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया गया है और सरकार इसकी खरीद में जरूरत पड़ने पर अच्छी दिलचस्पी दिखा सकती है।

वैसे मक्का का दाम सरकारी समर्थन मूल्य से ऊपर ही रहने की संभावना है क्योंकि परम्परागत खपतकर्ता उद्योगों के साथ-साथ एथनॉल निर्माण में इसकी विशाल मात्रा का उपयोग होने लगा है।

उत्पादकों को अपने मक्का का स्टॉक बेचने के लिए संघर्ष नहीं करना पड़ता है। कुछ राज्यों में बारिश का अभाव है जिससे वहां बिजाई की रफ्तार कुछ धीमी है।

मानसून क्रमिक रूप से मजबूत तथा गतिशील हो रहा है और अलग-अलग क्षेत्रों में बारिश हो रही है। इसे देखते हुए आगामी सप्ताहों के दौरान खरीफ फसलों की बिजाई में अच्छी प्रगति होने की उम्मीद है। क्षेत्रफल में वृद्धि का सिलसिला आगे भी जारी रह सकता है।