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02-Nov-2026 04:36 PM
नई दिल्ली। खरीफ कालीन फसलों के उत्पादन में गिरावट की संभावना तथा रबी कालीन फसलों की बिजाई की धीमी गति से खाद्य महंगाई में क्रमिक रूप से इजाफा हो रहा है और आगे भी इसका सिलसिला जारी रहने की आशंका है। ऐसा प्रतीत होता है कि आगामी महीनों में खाद्य महंगाई का ग्राफ चिंताजनक स्तर तक ऊंचा उठ सकता है।
चावल, चीनी, दाल तथा खाद्य तेलों का खुदरा भाव पहले ही गत वर्ष से काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच चुका है जिससे आम उपभोक्ताओं की कठिनाई काफी बढ़ गई है। खरीफ फसलों की कटाई-तैयारी एवं मंडियों में आपूर्ति की रफ्तार धीरे-धीरे बढ़ती जा रही है लेकिन फिर भी कीमतों में नरमी का माहौल नहीं देखा जा रहा है जबकि आमतौर पर आपूर्ति के सीजन में कीमतों पर कुछ दबाव रहता है।
उपभोक्ता मामले विभाग के मूल्य निगरानी प्रकोष्ठ के आंकड़ों से पता चलता है कि चावल, चीनी, सरसों तेल, मसाले तथा प्याज सहित कई अन्य प्रमुख खाद्य उत्पादों का भाव गत वर्ष से काफी ऊंचा चल रहा है। अल नीनो मौसम चक्र के प्रभाव से मानसून की बारिश कम होने से खरीफ फसलों का उत्पादन आंशिक रूप से प्रभावित होने की आशंका है। उधर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में अधिकांश जिंसों का भाव ऊंचा एवं तेज चल रहा है जिससे भारत में खासकर खाद्य तेलों एवं दाल-दलहनों का आयात महंगा बैठ रहा है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार उपभोक्ता मूल्य सूचकांक पर आधारित खाद्य महंगाई की दर सितम्बर में उछलकर 7.74 प्रतिशत के उच्च स्तर पर पहुंच गई। इसके तहत खाद्य तेलों के साथ-साथ मसालों (प्याज, लहसुन, अदरक एवं कालीमिर्च आदि) की कीमतों में भारी वृद्धि हो गई।
खरीफ फसलों के उत्पादन का परिदृश्य मिश्रित नजर आ रहा है। कुछ इलाकों में इसकी अच्छी पैदावार होने की उम्मीद है जबकि कुछ अन्य क्षेत्रों में उत्पादन कमजोर होने की आशंका है। दलहन, तिलहन और कपास तथा गन्ना की पैदावार में कमी आ सकती है। मोटे अनाजों में मक्का की फसल पर खतरा है। रबी बिजाई भी संतोषजनक नहीं है।