खाद्य निगम के स्टॉक में टूटे चावल की भागीदारी घटाने का निर्णय

17-Mar-2025 11:39 AM

नई दिल्ली। केन्द्र सरकार ने एक पायलट प्रोजेक्ट आरंभ करने का निर्णय लिया है जिसका उद्देश्य भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) द्वारा संचालित चावल के स्टॉक में टूटे दाने वाले माल की हिस्सेदारी घटाकर 10 प्रतिशत पर लाना है जो फिलहाल 25 प्रतिशत तक है।

इससे जहां एक ओर राशन दुकानों के जरिए वितरित होने वाले चावल की क्वालिटी में सुधार आएगा वहीं दूसरी तरफ एथनॉल निर्माण के लिए टूटे चावल की उपलब्धता बढ़ेगी और खाद्य निगम को भंडारण खर्च घटाने का अवसर भी मिल जाएगा।

इसके अलावा अगर यह योजना सफल रही तो इससे सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) में चावल की लीकेज घटाने में भी मदद मिलेगी। एथनॉल निर्माता राइस मिलर्स से अधिक मात्रा में टूटे चावल का स्टॉक प्राप्त कर सकेंगे।

इस योजना के अंतर्गत 15 प्रतिशत टूट वाले चावल का अंश अलग किया जाएगा और चावल मिलें सीधे एथनॉल निर्माताओं को उसकी बिक्री करेंगी।

उल्लेखनीय है कि सरकार द्वारा 31 अक्टूबर 2025 तक की अवधि के लिए एथनॉल निर्माण हेतु डिस्टीलरीज के लिए भारतीय खाद्य निगम के गोदामों से 24 लाख टन चावल की आपूर्ति का कोटा आवंटित किया गया है।

इस चावल का दाम 2250 रुपए प्रति क्विंटल नियत किया गया है। जब इस चावल की आपूर्ति डिस्टीलरिज को की जाती है तब उसका कुछ अंश खुले बाजार में पहुंचने की आशंका रहती है क्योंकि राइस मिलों से डिस्टीलर्स को इससे सस्ते दाम पर 100 प्रतिशत टूटा चावल प्राप्त हो जाता है।

जब खाद्य निगम के गोदामों से ही 100 प्रतिशत चावल की आपूर्ति आरंभ हो जाएगी तब डिस्टीलर्स को उसे खुले बाजार में बेचने का मौका नहीं मिल पाएगा इसके अलावा टुकड़ी चावल के घरेलू बाजार मूल्य में भी कुछ बढ़ोत्तरी हो सकती है क्योंकि 100 प्रतिशत टूटे चावल के निर्यात की अनुमति प्रदान कर दी गई है।