खाद्य श्रेणी के सभी तिलहनों के बिजाई क्षेत्र में भारी गिरावट

19-Aug-2025 06:09 PM

नई दिल्ली। खरीफ सीजन में उत्पादित होने वाली खाद्य श्रेणी की सभी प्रमुख तिलहन फसलों-सोयाबीन, मूंगफली, तिल, सूरजमुखी एवं नाइजरसीड का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से पीछे चल रहा है। हालांकि अरंडी का रकबा 1.21 लाख हेक्टेयर आगे हो गया है और गुजरात-राजस्थान जैसे शीर्ष उत्पादक राज्यों में इसकी बिजाई अभी जारी है लेकिन इसे मुख्यतः एक अखाद्य या औद्योगिक संवर्ग का तिलहन माना जाता है। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार चालू खरीफ सीजन के दौरान तिलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 178.64 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा है जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 185.38 लाख हेक्टेयर से 6.74 लाख हेक्टेयर या 3.63 प्रतिशत तथा सामान्य (पंचवर्षीय) औसत क्षेत्रफल 194.63 लाख हेक्टेयर से करीब 16 लाख हेक्टेयर कम है।

पिछले साल के मुकाबले चालू खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र 124.59 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 119.82 लाख हेक्टेयर, मूंगफली का बिजाई क्षेत्र 46.07 लाख हेक्टेयर से घटकर 43.98 लाख हेक्टेयर, तिल का क्षेत्रफल 10.12 लाख हेक्टेयर  से गिरकर 9.22 लाख हेक्टेयर तथा सूरजमुखी का रकबा 68 हजार हेक्टेयर से फिसलकर 61 हजार हेक्टेयर पर अटक गया।

नाइजर सीड का क्षेत्रफल भी 27 हजार हेक्टेयर से गिरकर 16 हजार हेक्टेयर रह गया मगर अरंडी का बिजाई क्षेत्र 3.58 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 4.79 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया। 

सामान्य औसत क्षेत्रफल की तुलना में सभी तिलहन फसलों का बिजाई क्षेत्र काफी पीछे चल रहा है और बिजाई की प्रक्रिया बिल्कुल अंतिम चरण में पहुंचने से इसके रकबे में आगे ज्यादा सुधार आने के आसार भी नहीं हैं।

कुछ इलाकों में जोरदार वर्षा एवं बाढ़ के प्रकोप से तिलहन फसलों को नुकसान होने की आशंका भी है। आगे का मौसम फसल के लिए निर्णायक साबित होगा।