खाद्य तेलों का आयात 5 प्रतिशत गिरकर 155 लाख टन से नीचे जाने का अनुमान

19-Aug-2025 01:31 PM

मुम्बई। स्वदेशी वनस्पति तेल उद्योग एवं व्यापार क्षेत्र के एक अग्रणी संगठन-सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) के अधीनस्थ निदेशक ने 2024-25 के वर्तमान मार्केटिंग सीजन (नवम्बर-अक्टूबर) के दौरान देश में खाद्य तेलों का कुल आयात घटकर 155 लाख टन से नीचे आने का अनुमान लगाया है जो 2023-24 सीजन के सकल आयात 160 लाख टन से करीब 5 प्रतिशत कम है।

ज्ञात हो कि भारत में मुख्यतः पाम तेल, सोयाबीन तेल एवं सूरजमुखी तेल का आयात होता है। समझा जाता है कि स्वदेशी स्रोतों से तिलहन तेल का उत्पादन बढ़ने तथा ऊंचे खुदरा मूल्य के कारण मांग कुछ कमजोर रहने से खाद्य तेलों के आयात में गिरावट आएगी। चालू वर्ष के शुरूआती चार महीनों (जनवरी-अप्रैल 2025) के दौरान खाद्य तेल और खासकर पाम तेल का आयात काफी घट गया था। 

'सी' के अनुसार सरसों, सोयाबीन तथा मूंगफली में घरेलू उत्पादन में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई जिससे खाद्य तेलों की आपूर्ति एवं उपलब्धता बढ़ गई। लेकिन दूसरी ओर पिछले कई महीनों से खाद्य तेलों का खुदरा बाजार भाव काफी ऊंचा और मजबूत बना हुआ है।

जिससे आबादी के कुछ संवर्ग में इसकी मांग एवं खपत प्रभावित हो रही है। सरसों तेल का दाम उछलकर काफी ऊंचे स्तर पर पहुंच गया है। 

कार्यकारी निदेशक के मुताबिक यद्यपि 2024-25 सीजन के दौरान देश में कुल 155 लाख टन खाद्य तेलों के आयात का अनुमान लगाया जा रहा है लेकिन मौजूदा संकेतों से प्रतीत होता है कि इसका वास्तविक आयात उससे 2 लाख टन कम हो सकता है। भारत में लगभग 250 लाख टन खाद्य तेलों का वार्षिक उपयोग होता है जिसमें से 57 प्रतिशत का आयात विदेशों से किया जाता है। 

एसोसिएशन के आंकड़ों से पता चलता है कि वर्तमान मार्केटिंग सीजन के शुरुआती नौ महीनों में यानी नवम्बर 2024 से जुलाई 2025 के दौरान देश में खाद्य तेलों का कुल आयात घटकर 107.50 लाख टन के आसपास सिमट गया जो 2023-24 सीजन की समान अवधि के आयात से करीब 10 प्रतिशत कम रहा।

इसके तहत खासकर पाम तेल का आयात शामिल नहीं है। समीक्षाधीन अवधि के दौरान पाम तेल का आयात 25 प्रतिशत लुढ़ककर 51.40 लाख टन रह गया और कुल खाद्य तेल के आयात में इसकी भागीदारी 57 प्रतिशत से घटकर 48 प्रतिशत पर अटक गई।