खाद्य तेलों की खपत घटाने के प्रधानमंत्री के आग्रह पर 'सी' की सकारात्मक राय

11-May-2026 07:20 PM

हैदराबाद। माननीय प्रधानमंत्री ने आम उपभोक्ताओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने तथा बहुमूल्य विदेशी मुद्रा की बचत करने के उद्देश्य से खाद्य तेलों की घरेलू खपत को नियंत्रित करने की आवश्यकता पर जोर दिया है। भारत दुनिया में खाद्य  तेलों का सबसे बड़ा आयातक देश बना हुआ है क्योंकि मांग एवं खपत की तुलना में इसका घरेलू उत्पादन बहुत कम होता है।

प्रधानमंत्री के आग्रह पर सकारात्मक प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए एक अग्रणी उद्योग संगठन- सॉल्वेंट एक्सट्रैक्टर्स   एसोसिएशन ऑफ इंडिया (सी) ने कहा है कि "भविष्य के संकट के साथ संघर्ष करने से बेहतर है कि वर्तमान में ही एहतियाती उपाय कर लिए जाएं।" प्रधानमंत्री की अपील का गहरा आर्थिक और रणनीतिक महत्व है।

एसोसिएशन के कार्यकारी निदेशक के अनुसार मौसम एवं जलवायु की बढ़ती अनिश्चितता, कई देशों में बायो डीजल में खाद्य तेलों के बढ़ते उपयोग से आपूर्ति में आने वाली जटिलता और जियो पॉलिटिकल तनाव के कारण नए जोखिम उत्पन्न हो रहे हैं। संभवतः देश के लिए यह सही समय है कि वह भविष्य के प्रति सचेत हो जाए और दीर्घकालीन उपायों को अपनाना शुरू करे।

इसके तहत एक तरफ तिलहन-तेल का घरेलू उत्पादन बढ़ाने और दूसरी ओर खाद्य तेलों की खपत को संतुलित रखने की सख्त आवश्यकता है। आगे अल नीनो का खतरा है जबकि पश्चिम एशिया का संकट जारी है। खाद्य तेलों का आयात महंगा हो गया है और इसमें बाधा भी उत्पन्न हो रही है। भारत को खाद्य तेलों के आयात को नियंत्रित करना होगा।