खाद्य तेलों के दाम में जल्दी ही कुछ गिरावट आने की संभावना
10-Dec-2024 04:32 PM
मुम्बई । त्यौहारी सीजन के दौरान खाद्य तेलों की मांग एवं खपत में इजाफा होने से कीमतों में अच्छी बढोत्तरी देखी गई और नवम्बर में भी आम उपभोक्ताओं को कोई खास राहत नहीं मिल सकी।
सोयाबीन तेल का खुदरा मूल्य उछलकर 160-170 रुपए प्रति लीटर के उच्च स्तर पर पहुंच गया था। अवकाश वाली अवधि के दौरान खाद्य तेलों के खर्च में जोरदार वृद्धि हो गई और अक्टूबर में पाम तेल का भाव 37 प्रतिशत ऊपर उछल गया इसी तरह समीक्षाधीन अवधि के दौरान सरसों तेल के मूल्य में 29 प्रतिशत, सोयाबीन तेल तथा सूरजमुखी के दाम में 23-23 प्रतिशत तथा मूंगफली तेल के भाव में 4 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी दर्ज की गई।
पहले यह उम्मीद की जा रही थी कि त्यौहारी सीजन की समाप्ति के बाद खाद्य तेलों के दाम में नरमी आ सकती है लेकिन नवम्बर में अधिकांश खाद्य तेलों का भाव ऊंचे स्तर पर ही बरकरार रहा।
सरकारी सूत्रों के अनुसार कुछ ऐसे कारकों की वजह से कीमतों में तेजी-मजबूती कायम रही जिसे नियंत्रित करना सरकार के लिए आसान नहीं था एक तो खाद्य तेलों पर आयात शुल्क में 20 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी की गई और दूसरे, वैश्विक बाजार भाव तेज हो गया।
दक्षिण-पूर्व एशिया में पाम तेल का सीजन भी कमजोर पड़ गया है। सरकार ने अभी तक पाम तेल, सोयाबीन तेल और सूरजमुखी तेल पर आयात शुल्क घटाने के बारे में कोई निर्णय नहीं लिया है।
14 सितम्बर 2024 को क्रूड एवं रिफाइंड श्रेणी के खाद्य तेलों पर आयात शुल्क बढ़ाने का फैसला किया गया था जिसका मुख्य उद्देश्य खरीफ कालीन तिलहन फसलों और खासकर सोयाबीन का घरेलू बाजार भाव ऊंचा उठाना था।
लेकिन यह उद्देश्य सफल नहीं हो सका और सोयाबीन का भाव ऊपर उठने के बजाए और नीचे आ गया। मूंगफली की कीमत पर भी दबाव बढ़ गया।
अब सोयाबीन तेल का वैश्विक बाजार भाव नरम पड़ गया है और घरेलू स्रोतों से इसकी आवक भी बढ़ गई है। सरसों तेल के दाम में भी कुछ नरमी आई है जबकि इसकी बिजाई गत वर्ष से पीछे चल रही है।
आपूर्ति एवं उपलब्धता की सुगम स्थिति को देखते हुए आगामी समय में खाद्य तेलों के दाम में कुछ नरमी आने की संभावना व्यक्त की जा रही है।
