ला नीना मौसम चक्र के निर्माण के लिए बन रहा है आधार

29-Jan-2025 04:25 PM

सिडनी । अमरीका के नेशनल ओसियानिक एंड एटमोस्फेरिक एडमिनिस्ट्रेशन (नोआ) के एक निकाय- मौसम भविष्यवाणी केन्द्र (सीपीसी) ने कहा है कि ला नीना मौसम चक्र के निर्माण के लिए परिस्थितियां तो मौजूद हैं लेकिन फिलहाल यह अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई हैं।

मौसम केन्द्र के आंकड़ों से पता चलता है कि ओसियन नीनो इंडेक्स (ओएनआई) का मान उस आधार स्तर तक पहुंचना अभी बाकी है जिस पर ला नीना मौसम चक्र का निर्माण होता है। 

भारत वैसे कृषि प्रधान देश के लिए ला नीना मौसम चक्र अक्सर हितैषी रहा है क्योंकि इससे मानसून की तीव्रता, सघनता एवं  निरंतरता को बल मिलता है।

इसके विपरीत अल नीनो मौसम चक्र को दक्षिण-पश्चिम मानसून का विरोधी माना जाता है। मानसून सीजन के दौरान वर्षा की निरंतरता से खरीफ फसलों की बिजाई एवं प्रगति में अच्छी सहायता मिलती है।  

मौसम भविष्यवाणी केन्द्र (सीपीसी) का मानना है कि अल नीनो अथवा ला नीना की स्थिति उस समय उत्पन्न होती है जब मासिक नीनो 3.4 ओआईएसएसटी की निकासी नियमित वातावरणीय विशेषज्ञों के साथ + / - 0.5 डिग्री सेल्सियस तक या उससे ऊपर पहुंचती है।

ये तमाम बातें तीन लगातार महीनों तक बरकरार रहना आवश्यक है। इसके आधार पर ही अल नीनो अथवा ला नीना की उत्पत्ति की भविष्यवाणी की जाती है।  

लेकिन सबसे निकटवर्ती समय में यानी अक्टूबर-सितम्बर 2024 की अवधि के दौरान ओएनआई का मान (वैल्यू) - 0.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

यह देखना आवश्यक होगा कि नवम्बर से जनवरी की तिमाही में यह मान कहां तक पहुंचता है। अभी इसका आंकलन नहीं किया गया है।

यदि यह जनवरी के अंत तक - 0.5 डिग्री सेल्सियस तक या उससे ऊपर पहुंचता है तो ला नीना के आगमन की सटीक भविष्यवाणी की जा सकती है। आमतौर पर ओएनआई का ऋणात्मक मान ला नीना का तथा घनात्मक मान अल नीनो का संकेतक माना जाता है।

यह ओएनआई  समुद्री सतह की तिमाही औसत तापमान में आने वाले उतार-चढ़ाव का घूमता चक्र है। ट्रॉपिकल प्रशांत महासागार के पूर्व- मध्यवर्ती भाग में जल की सतह के तापमान में होने वाले परिवर्तन के औसत आधार पर इसका लेखा-जोखा तैयार किया जाता है।