लगातार बारिश एवं नम मौसम से सोयाबीन की फसल को खतरा
02-Sep-2024 01:30 PM
इंदौर । हालांकि दक्षिण-पश्चिम मानसून की अच्छी वर्षा से आमतौर पर खरीफ फसलों के विकास में अच्छी सहायता मिल रही है लेकिन सोयाबीन के कुछ महत्वपूर्ण उत्पादक इलाकों में नियमित रूप से हो रही बारिश, नम मौसम तथा बादलों के कारण धूप की कमी से फसल में कीड़ों-रोगों का प्रकोप फैलने की आशंका बढ़ गई है।
इंदौर स्थित भारतीय सोयाबीन अनुसंधान संस्थान द्वारा जारी एक एडवायजरी में कहा गया है कि सबसे प्रमुख उत्पादक प्रान्त- मध्य प्रदेश में रतलाम तथा उज्जैन सहित कई अन्य क्षेत्रों में सोयाबीन की फसल पर कीड़ों-रोगों का प्रकोप शुरू हो गया है। प्रभावित क्षेत्रों में किसानों को सुरक्षात्मक उपाय लागू करना चाहिए।
मध्य प्रदेश में खरीफ सीजन के दौरान सोयाबीन, कपास, मक्का एवं दलहन फसलों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है।
सोयाबीन वहां की सबसे प्रमुख तिलहन फसल है। सोयाबीन की अगैती बिजाई वाली फसल में दाना लगने की प्रक्रिया आरंभ हो चुकी है जबकि पिछैती बिजाई वाली फसल में फूल आने शुरू हो गए हैं।
यह समय फसल की प्रगति के लिए अत्यन्त महत्वपूर्ण है और ऐसे वक्त में उसे कीड़ों-रोगों के घातक प्रकोप से सुरक्षित रखना जरुरी है।
कृषि विशेषज्ञों के मुताबिक सामान्यतः वर्तमान समय की बारिश सोयाबीन की फसल के लिए लाभदायक है लेकिन इसके साथ-साथ फसल के लिए धूप भी आवश्यक है।
आसमान पर बादल छाए रहने तथा बीच-बीच में बारिश होने से न केवल फसल की प्रगति प्रभावित हो रही है बल्कि उस पर कीड़ों-क्षेत्रों का प्रकोप फैलने का खतरा भी बढ़ गया है।
मध्य प्रदेश में लम्बे समय तक बिजाई सीजन के दौरान मौसम गर्म एवं शुष्क रहने से बारिश की सख्त आवश्यकता महसूस की जा रही थी लेकिन अब वर्षा की शुरुआत हुई तो यह फसलों के लिए खतरनाक बन गई।
अत्यन्त वर्षा के कारण निचले इलाकों के खेपों में पानी भर गया है और वहां सोयाबीन की उपज दर में भारी गिरावट आ सकती है।
