लगातार चौथे साल गेहूं की सरकारी खरीद नियत लक्ष्य से कम होने की संभावना
20-May-2025 12:55 PM
नई दिल्ली। यद्यपि चालू वर्ष के दौरान केन्द्रीय कृषि मंत्रालय ने 1154.30 लाख टन गेहूं के रिकॉर्ड घरेलू उत्पादन का अनुमान लगाया है जबकि अमरीकी कृषि विभाग (उस्डा) ने एक कदम और आगे बढ़कर कुल पैदावार 1170 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंचने की संभावना व्यक्त की है लेकिन इसके बावजूद इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न की सरकारी खरीद में अपेक्षित इजाफा नहीं हो सका। हकीकत तो यह है कि लगातार चौथे साल गेहूं की सरकारी खरीद नियत लक्ष्य से काफी पीछे रह जाएगी।
वर्तमान रबी मार्केटिंग सीजन में अभी तक राष्ट्रीय स्तर पर लगभग 296 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद संभव हो पाई है जो संशोधित लक्ष्य 332.70 लाख टन से काफी कम है।
इससे पूर्व 2024 में 266 लाख टन, 2023 में 262 लाख टन एवं 2022 में 188 लाख टन गेहूं की जो खरीद हुई थी वह भी नियत लक्ष्य से बहुत कम थी। वैसे सरकारी खरीद में निरंतर बढ़ोत्तरी अवश्य हो रही है।
अब तक के परिदृश्य को देखते हुए प्रतीत होता है कि इस बार गेहूं की सरकारी खरीद 300 लाख टन का आंकड़ा शायद पार नहीं कर पाएगी क्योंकि पंजाब-हरियाणा में खरीद की प्रक्रिया समाप्त हो चुकी है और मध्य प्रदेश, उत्तर प्रदेश, राजस्थान तथा बिहार जैसे राज्यों में सरकारी क्रय केन्द्रों पर सन्नाटा पसरने लगा है।
मौजूदा हालात और आंकड़ों से स्पष्ट संकेत मिलता है कि गेहूं की पारम्परिक खरीद- बिक्री के रुख में परिवर्तन होने लगा है। पहले किसान अपने अधिकांश गेहूं की बिक्री सरकारी एजेंसियों को करते हैं मगर अब प्राइवेट खरीदारों की सक्रियता बढ़ने लगी है।
इस बार फ्लोर मिलर्स / प्रोसेसर्स, व्यापारियों, स्टॉकिस्टों एवं बड़े-बड़े प्रतिष्ठानों द्वारा किसानों से भारी मात्रा में गेहूं की खरीद की गई है क्योंकि किसी के पास भी इस खाद्यान्न का भारी-भरकम पिछला बकाया स्टॉक मौजूद नहीं था।
फ्लोर मिलर्स की पाइप लाइन लगभग खाली हो गई थी। प्राइवेट खरीदारों द्वारा किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य से ऊंचे दाम पर गेहूं की खरीद की गई जिससे उत्पादकों को बेहतर आमदनी प्राप्त हुई।
हालांकि केन्द्रीय पूल में गेहूं का पिछला बकाया स्टॉक इस बार बेहतर था और सरकारी खरीद भी पिछले तीन वर्षों की तुलना में अच्छी हुई है इसलिए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सरकार को विशेष मशक्कत नहीं करनी पड़ेगी।
लेकिन फिर भी सरकार शायद खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के तहत अपने स्टॉक से गेहूं की बिक्री में जल्दबाजी नहीं दिखाना चाहेगी।
इसके बजाए वह विभिन्न तरीको से व्यापारियों / स्टॉकिस्टों के गेहूं की आपूर्ति बढ़ाने का प्रयास कर सकती है। यदि गेहूं की कीमतों में तेजी मजबूती का सिलसिला बरकरार रहता है तो स्टॉक लिमिट (भडारण सीमा) लगाने पर विचार किया जा सकता है।
