लालमिर्च का उत्पादन क्षेत्र गत वर्ष से कम मगर सामान्य स्तर के आसपास
22-Nov-2024 08:09 PM
मुम्बई । हालांकि पिछले साल के मुकाबले चालू वर्ष के दौरान राष्ट्रीय स्तर पर लालमिर्च के बिजाई क्षेत्र में 25-30 प्रतिशत की भारी गिरावट आने का अनुमान लगाया जा रहा है लेकिन जानकारों का कहना है कि इस पर ज्यादा हाय तौबा मचाने की जरूरत नहीं है और न ही इसके आधार पर बाजार को ऊपर उठाने का प्रयास स्थायी साबित होगा।
इसके तीन मुख्य कारण है। पहली बात तो यह है कि पिछला साल लालमिर्च की बिजाई और पैदावार की दृष्टि से असाधारण रहा था जब इसका क्षेत्रफल उछलकर 10 लाख हेक्टेयर के करीब पहुंच गया था।
उसके मुकाबले यदि इस बार बिजाई क्षेत्र घटा है तो इसे कोई असामान्य घटना नहीं माना जाना चाहिए क्योंकि इसका रकबा सामान्य स्तर पर आ गया है।
दूसरी बात यह है कि दक्षिण भारत के तीनों शीर्ष उत्पादक प्रांतों-आंध्र प्रदेश, तेलंगाना तथा कर्नाटक में लालमिर्च फसल की हालत काफी अच्छी है और यदि अगले कुछ महीनों तक मौसम ने कोई प्रत्याशित मोड़ नहीं किया तथा किसी प्राकृतिक आपदा एवं कीड़ों रोगों का प्रकोप नहीं रहा तो इसकी औसत उपज दर एवं क्वालिटी में सुधार आ सकता है।
वैसे मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र एवं गुजरात जैसे राज्यों में फसल को कुछ नुकसान हुआ है मगर बची हुई फसल की हालत अच्छी बताई जा रही है।
तीसरा कारण यह है कि पिछले साल के रिकॉर्ड उत्पादन के कारण लालमिर्च का विशाल अधिशेष स्टॉक अभी मौजूद है जिससे न केवल वर्तमान मार्केटिंग सीजन के शेष महीनों में घरेलू एवं निर्यात मांग को आसानी से पूरा किया जा सकेगा बल्कि अगले सीजन के लिए भी भारी-भरकम स्टॉक उपलब्ध रह सकता है।
फिलहाल गुंटूर लाइन में 40-42 लाख बोरी, कर्नाटक में 40-50 लाख बोरी एवं तेलंगाना में 20 लाख बोरी लालमिर्च का स्टॉक मौजूद होने का अनुमान है जबकि प्रत्येक बोरी 40 किलो की होती है। इसी विशालकाय स्टॉक के कारण लालमिर्च की कीमतों पर भारी दबाव देखा जा रहा है।
इस बार लालमिर्च की बिजाई देर से हुई और कहीं-कहीं तो यह अब भी जारी है। जहां पानी उपलब्ध है वहां किसान इसकी बिजाई का प्रयास कर रहे हैं।
