मुफ्त राशन योजना के तहत गेहूं का अतिरिक्त आवंटन होने की उम्मीद

02-May-2025 03:54 PM

नई दिल्ली। केन्द्रीय पूल के लिए इस बार गेहूं की खरीद में अच्छी बढ़ोत्तरी हो रही है जबकि पहले से ही उसमें इसका स्टॉक गत वर्ष से काफी अधिक मौजूद था।

सरकार ने 322.70 लाख टन गेहूं की खरीद का लक्ष्य निर्धारित किया है और उसे इसके हासिल होने का पक्का भरोसा भी है। सभी प्रमुख उत्पादक राज्यों में गेहूं की खरीद गत वर्ष से अधिक हुई है और खरीद की प्रक्रिया अभी जोर शोर से जारी है। 

अनुकूल माहौल को देखते हुए सरकार प्रधानमंत्री गरीब कल्याण अन्न योजना के तहत राज्यों को गेहूं का आवंटन बढ़ाने पर गम्भीरतापूर्वक विचार कर सकती है।

सरकार की एक सोच यह भी है कि केन्द्रीय पूल में गेहूं का स्टॉक इतना ऊंचा हो कि खुले बाजार बिक्री योजना (ओएमएसएस) के अंतर्गत कम से कम 60-70 लाख टन की बिक्री सुनिश्चित हो सके और मार्केटिंग सीजन के अंत में केन्द्रीय पूल में इस महत्वपूर्ण खाद्यान्न का अधिशेष स्टॉक न्यूनतम आवश्यक मात्रा से ऊंचा रहे। 

सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के अंतर्गत गेहूं की कितनी मात्रा का अतिरिक्त आवंटन किया जाएगा यह सरकारी स्टॉक की पोजीशन पर निर्भर करेगा।

यदि  खरीद की मात्रा नियत लक्ष्य या उससे ऊपर पहुंचती है और घरेलू बाजार भाव में ज्यादा तेजी का माहौल नहीं रहता है तो पीडीएस में गेहूं की सामान्य आपूर्ति बहाल करने में सरकार को ज्यादा कठिनाई नहीं होगी।

चूंकि इस बार शानदार उत्पादन होने से प्राइवेट व्यापारियों द्वारा भी अच्छी मात्रा में गेहूं खरीदा जा रहा है इसलिए आगामी महीनों के दौरान घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति बेहतर रहने की उम्मीद है। 

इसके फलस्वरूप सरकार को ओएमएसएस के तहत कम मात्रा में गेहूं उतारने की आवश्यकता पड़ेगी। 

गेहूं की सरकारी खरीद गत वर्ष से काफी आगे चल रही है। पंजाब, मध्य प्रदेश, हरियाणा एवं राजस्थान में खरीद का प्रदर्शन बेहतर है। पिछले तीन साल से गेहूं की सरकारी खरीद नियत लक्ष्य से काफी कम हो रही थी इसलिए सरकार को कठिन निर्णय लेना पड़ रहा था और गेहूं का घरेलू बाजार भाव भी ऊंचा  चल रहा था।

इस बार परिदृश्य बदलता नजर आ रहा है। वर्ष 2022 में 188 लाख टन, 2023 में 262 लाख टन तथा 2024 में 266 लाख टन गेहूं की सरकारी खरीद हुई थी।

अक्टूबर 2024 में सरकार ने मुफ्त राशन योजना में वितरण के लिए 35 लाख टन अतिरिक्त गेहूं का आवंटन किया था जिससे लाभार्थियों को कुछ राहत मिली थी। इसके साथ कुल वार्षिक आवंटन 220 लाख टन पर पहुंचा था।