मांग एवं आपूर्ति के अनुरूप लालमिर्च की कीमतों में सीमित तेजी-मंदी

16-Jun-2025 03:42 PM

गुंटूर। प्रमुख उत्पादक राज्यों में लालमिर्च की नई फसल के लिए बिजाई आरंभ हो चुकी है और अब इसके सबसे प्रमुख (बेंचमार्क) व्यापारिक केन्द्र- गुंटूर मंडी में ग्रीष्मकालीन अवकाश भी खत्म हो चुका है।

वहां लालमिर्च की दैनिक आवक सामान्य औसत की हो रही है जबकि व्यापारियों / निर्यातकों की लिवाली भी हो रही है। गुंटूर मंडी में लगभग एक माह के अवकाश के बाद 12 जून से कारोबारी गतिविधियां पुनः आरंभ हो गई। वहां करीब 50-55 हजार बोरी लालमिर्च की दैनिक आवक हो रही है। 

मसाला बोर्ड के आंकड़ों से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2023-24 की तुलना में 2024-25 के दौरान लालमिर्च के निर्यात में कुछ कमी आ गई। ध्यान देने की बात है कि भारत से मसालों के निर्यात में मात्रा एवं आमदनी की दृष्टि से लालमिर्च प्रथम स्थान पर रहती है।

लालमिर्च का पिछला  उत्पादन लगभग सामान्य रहा था जबकि इसका पिछला बकाया स्टॉक भी मौजदू था। इससे कीमतों पर दबाव बना रहा जबकि बीच-बीच में बाजार कुछ तेज भी हुआ।

आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, कर्नाटक तथा मध्य प्रदेश जैसे प्रमुख उत्पादक प्रांतों में लालमिर्च की बिजाई के प्रति किसानों में उत्साह एवं आकर्षण बरकरार है और वहां अच्छी बारिश भी हो रही है। किसानों को पहले कीड़ों-रोगों से फसल को नुकसान की चिंता रहती थी मगर अब इस पर काफी हद तक नियंत्रण लग गया है। 

आंध्र प्रदेश की गुंटूर एवं तेलंगाना की वारंगल मंडी में लालमिर्च की सामान्य आवक के बीच कीमतों में सीमित उतार-चढ़ाव के साथ लगभग स्थिरता बनी हुई है।

व्यापार विश्लेषकों के मुताबिक घरेलू बाजार  में खपत का पीक सीजन समाप्त हो गया है इसलिए निर्यात प्रदर्शन पर कीमतों का रुख निर्भर करेगा।

उत्पादक एवं स्टॉकिस्ट बाजार की स्थिति को भांपते हुए अपना माल उतार रहे हैं और इसलिए कीमतों में भारी तेजी-मंदी नहीं देखी जा रही है।

अमरीका, यूरोप एवं मध्य पूर्व एशिया में लालमिर्च का थोड़ा-बहुत निर्यात हो रहा है मगर बांग्ला देश, मलेशिया एवं चीन आदि में अपेक्षित मांग नहीं निकल रही है। उत्पादकों एवं निर्यातकों को इसका इंतजार है।