मांग और आपूर्ति संतुलन होने से चीनी के दाम में स्थिरता
07-Jan-2026 08:50 PM
पुणे। घरेलू बाजार में मांग एवं आपूर्ति के बीच बेहतर संतुलन बरकरार रहने से चीनी का भाव सीमित उतार-चढ़ाव के साथ एक निश्चित सीमा में लगभग स्थिर बना हुआ है और निकट भविष्य में इसमें जोरदार तेजी आने की संभावना नहीं है।
दिसम्बर 2025 की भांति जनवरी 2026 के लिए भी 22 लाख टन चीनी की घरेलू बिक्री का मासिक कोटा जारी किया गया है जो मांग एवं जरूरत को पूरा करने के लिए पर्याप्त माना जा रहा है। उत्तरी भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है जिससे खासकर कोल्ड ड्रिंक्स एवं आइसक्रीम निर्माण में चीनी का उपयोग बहुत घट गया है।
औद्योगिक मांग के सहारे ही चीनी की कीमतों को मजबूती मिलती है। फिलहल मकर संक्रांति के लिए उत्तरी भारत में तथा पोंगल पर्व के कारण दक्षिणी राज्यों में चीनी की थोड़ी-बहुत मांग निकल रही है। मकर संक्रांति के बाद लग्नसरा का सीजन शुरू होने वाला है और तब चीनी की मांग कुछ सुधर सकती है।
गन्ना की जोरदार क्रशिंग होने से चीनी के उत्पादन में अच्छी वृद्धि हो रही है और मिलों के पास स्टॉक बढ़ता जा रहा है। हालांकि सरकार द्वारा 2025-26 के मार्केटिंग सीजन (अक्टूबर-सितम्बर) के लिए 15 लाख टन चीनी के निर्यात की स्वीकृति दी गई है लेकिन इसके शिपमेंट की गति धीमी चल रही है।
अभी तक 1.00-1.25 लाख टन चीनी का निर्यात अनुबंध हुआ है जिसमें से 50-60 हजार टन का वास्तविक शिपमेंट भी हो चुका है चीनी का अंतर्राष्ट्रीय बाजार भाव अभी तक नरम चल रहा है
लेकिन अब इसमें कुछ तेजी आने की उम्मीद है क्योंकि सबसे प्रमुख उत्पादक एवं निर्यातक देश- ब्राजील में उत्पादन का सीजन समाप्त होने वाला है जिससे वहां से चीनी के निर्यात की गति धीमी पड़ जाएगी। इससे भारतीय निर्यातकों को नए अवसर मिल सकते हैं।
महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक एवं गुजरात जैसे शीर्ष उत्पादक राज्यों में चीनी के उत्पादन में इजाफा हो रहा है। एथनॉल निर्माण के लिए इस बार 34-35 लाख टन चीनी के समतुल्य गन्ना अवयवों (मुख्यतः शीरा) का उपयोग होने की संभावना है जिससे मिलर्स की आमदनी सीमित रहेगी और गन्ना उत्पादकों के बकाया मूल्य का सही समय पर भुगतान सुनिश्चित करने के लिए उसे चीनी की नियमित बिक्री करनी पड़ेगी।
