महाराष्ट्र में अच्छी बारिश के सहारे खरीफ फसलों के रकबे में भारी वृद्धि

12-Jun-2025 03:22 PM

महाराष्ट्र। देश के पश्चिमी प्रान्त- महाराष्ट्र में इस बार मानसून पूर्व के साथ-साथ दक्षिण-पश्चिम मानसून सीजन के शुरुआती चरण में भी भारी वर्षा हुई जिससे किसानों को खरीफ फसलों की अगैती बिजाई का अवसर मिल रहा है। राज्य कृषि विभाग के आंकड़ों से पता चलता है कि चालू वर्ष के दौरान 9 जून तक महाराष्ट्र में खरीफ फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र बढ़कर 1.28 लाख हेक्टेयर के करीब पहुंच गया जो गत वर्ष की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 52 हजार हेक्टेयर से 76 हजार हेक्टेयर अधिक है। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल के मुकाबले चालू खरीफ सीजन के दौरान महाराष्ट्र में धान का उत्पादन क्षेत्र तो 10 हजार हेक्टेयर से लुढ़ककर 1200 हेक्टेयर के करीब सिमट गया मगर ज्वार का रकबा 25 हेक्टेयर से सुधरकर 117 हेक्टेयर, बाजरा का बिजाई क्षेत्र 144 हेक्टेयर से बढ़कर 2973 हेक्टेयर तथा मक्का का क्षेत्रफल 474 हेक्टेयर से उछलकर 6323 हेक्टेयर पर पहुंच गया। अन्य मोटे अनाजों का रकबा भी 8 हेक्टेयर से बढ़कर 149 हेक्टेयर पर पहुंचा। इसके फलस्वरूप धान एवं मोटे अनाजों का कुल उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 10,745 हेक्टेयर के स्तर पर पहुंच गया। 

दलहन फसलों और खासकर अरहर (तुवर), उड़द एवं मूंग की बिजाई में जबरदस्त वृद्धि हुई है। दलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र पिछले साल के 567 हेक्टेयर से उछलकर इस बार 18,580 हेक्टेयर पर पहुंच गया है, इसके तहत तुवर का उत्पादन क्षेत्र 370 हेक्टेयर से उछलकर 9644 हेक्टेयर, मूंग का बिजाई क्षेत्र 30 हेक्टेयर से सुधरकर 2610 हेक्टेयर तथा उड़द का क्षेत्रफल 167 हेक्टेयर से बढ़कर 6151 हेक्टेयर पर पहुंच गया। अन्य दलहनों का रकबा भी 165 हेक्टेयर पर पहुंचा है जबकि पिछले साल 10 जून तक वहां इसकी बिजाई शुरू भी नहीं हुई थी। 

तिलहन फसलों में सोयाबीन का उत्पादन क्षेत्र 389 हेक्टेयर से बढ़कर 13,118 हेक्टेयर तथा औद्योगिक फसलों में कपास का उत्पादन क्षेत्र 40 हजार हेक्टेयर से दोगुने से ज्यादा उछलकर 85 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया। हालांकि सोयाबीन तथा कपास का थोक मंडी भाव काफी कमजोर रहा मगर सरकारी एजेंसियों द्वारा न्यूनतम समर्थन मूल्य पर इसकी विशाल खरीद किए जाने से किसानों को कुछ राहत मिली थी।