महाराष्ट्र में भारी वर्षा से सोयाबीन सहित अन्य फसलों को नुकसान
06-Oct-2025 11:36 AM
पुणे। पश्चिमी प्रान्त महाराष्ट्र के मराठवाड़ा संभाग में अगस्त- सितम्बर के दौरान हुई जोरदार बारिश एवं स्थानीय स्तर की बाढ़ से सोयाबीन एवं कपास सहित अन्य खरीफ फसलों को पहले ही काफी नुकसान हो चुका था
जबकि अब पिछले दो सीजन से हो रही बेमौसमी वर्षा से फसल की हालत और भी खराब हो गई है। मराठवाड़ा संभाग के जिलों में सोयाबीन की पकी हुई फसल की कटाई-तैयारी में किसानों को भारी कठिनाई हो रही है और वर्षा से सोयाबीन के दाने की क्वालिटी प्रभावित हो रही है।
कटाई-तैयारी की गति अत्यन्त धीमी होने से इस संभाग की प्रमुख मंडियों में सोयाबीन की आवक बहुत कम हो रही है। प्रतिकूल मौसम एवं प्राकृतिक आपदा से किसानों के साथ-साथ व्यापारी एवं मिलर्स भी चिंतित तथा परेशान हैं।
सोयाबीन के खेतों में पानी भर गया है जिससे इसकी गुणवत्ता पर असर पड़ने की आशंका है। उल्लेखनीय है कि मध्य प्रदेश के बाद महाराष्ट्र देश में सोयाबीन का दूसरा सबसे प्रमुख उत्पादक राज्य है।
तीसरे नम्बर पर राजस्थान है। इस बार तीनों प्रांतों में सोयाबीन की कम बिजाई हुई है जिससे राष्ट्रीय स्तर पर इस महत्वपूर्ण तिलहन के कुल क्षेत्रफल में करीब 5 लाख हेक्टेयर की भारी गिरावट आ गई है।
प्रमुख उत्पादक क्षेत्र की मंडियों में सोयाबीन की आपूर्ति का दबाव नहीं बन रहा है और फसल को क्षति भी हो रही है पीक त्यौहारी सीजन होने से क्रशिंग- प्रोसेसिंग इकाइयों में सोयाबीन की अच्छी मांग बनी हुई है।
मंडियों में सामान्य औसत क्वालिटी के माल की आवक का आयात देखा जा रहा है और हल्के माल का ऊंचा दाम मिलना मुश्किल है।
खेतों में पानी जमा होने तथा सोयाबीन सहित अन्य खरीफ फसलों की कटाई में बाधा पड़ने से रबी कालीन फसलों और खासकर चना की अगैती बिजाई शुरू करने में किसानों को भारी कठिनाई हो रही है।
समझा जाता है कि खेतों में ज्यादा समय तक जल का जमाव रहने पर अरहर (तुवर) की फसल भी प्रभावित हो सकती है। मराठवाड़ा पर मानसून इस बार जरूरत से ज्यादा मेहरबान रहा है जिससे वहां खरीफ फसलों को लगातार चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।
