महाराष्ट्र में ग्रीष्मकालीन फसलों के बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी
20-Mar-2025 11:37 AM
मुम्बई। देश के पश्चिमी भाग में अवस्थित एक महत्वपूर्ण कृषि उत्पादक राज्य- महाराष्ट्र में ग्रीष्मकालीन फसलों के बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी देखी जा रही है।
महाराष्ट्र कृषि विभाग द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले साल की तुलना में इस वर्ष राज्य में मक्का, ज्वार, बाजरा, दलहन एवं तिलहन फसलों की बिजाई में इजाफा हुआ है जबकि बिजाई की प्रक्रिया अभी जारी है।
आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले साल की समान अवधि के मुकाबले चालू वर्ष के दौरान महाराष्ट्र में 17 मार्च 2025 तक ग्रीष्मकालीन (जायद सीजन) धान का उत्पादन क्षेत्र 1.31 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.21 लाख हेक्टेयर रह गया लेकिन मक्का का बिजाई क्षेत्र 33 हजार हेक्टेयर से दोगुना उछलकर 66 हजार हेक्टेयर,
ज्वार का क्षेत्रफल 18 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 25 हजार हेक्टेयर से दोगुना उछलकर 66 हजार हेक्टेयर, ज्वार का क्षेत्रफल 18 हजार हेक्टेयर से सुधरकर 25 हजार हेक्टेयर तथा बाजरा का रकबा 23 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 29 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया।
इसके फलस्वरूप अनाजी फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र भी 2.05 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2.43 लाख हेक्टेयर हो गया।
इसी तरह दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र 6 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 10 हजार हेक्टेयर हो गया। इसके तहत मूंग का बिजाई क्षेत्र 4500 हेक्टेयर से बढ़कर 7100 हेक्टेयर, उड़द का क्षेत्रफल 410 हेक्टेयर से उछलकर 1115 हेक्टेयर तथा अन्य दलहनों का रकबा 1000 हेक्टेयर से सुधरकर 1810 हेक्टेयर हो गया।
तिलहन फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र भी पिछले साल के 67 हजार हेक्टेयर से उछलकर इस बार 1.06 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा। इसके अंतर्गत मूंगफली का बिजाई क्षेत्र 54 हजार हेक्टेयर से बढ़कर 75 हजार हेक्टेयर,
सूरजमुखी का क्षेत्रफल 440 हेक्टेयर से बढ़कर 4260 हेक्टेयर तथा तिल का रकबा 9 हजार हेक्टेयर से उछलकर 24 हजार हेक्टेयर पर पहुंच गया।
महाराष्ट्र में मौसम की हालत सामान्य बनी हुई है और बांधों- जलाशयों में पानी का अच्छा स्टॉक उपलब्ध है। इससे फसलों की सिंचाई में सहायता मिलेगी।
