महाराष्ट्र में रबी फसलों के उत्पादन क्षेत्र में भारी गिरावट

11-Nov-2025 06:16 PM

मुम्बई। महाराष्ट्र में कुछ खास कारणों से रबी फसलों की बिजाई धीमी गति से चल रही है और इसका क्षेत्रफल गत वर्ष से काफी पीछे हो गया है।

एक तो वहां बेमौसमी वर्षा से खेतों की मिटटी में नमी का अंश जरूरत से ज्यादा बढ़ गया है और दूसरे, खरीफ फसलों की कटाई-तैयारी में भी समस्या आ रही है। प्राकृतिक आपदाओं से राज्य में खरीफ फसलों को नुकसान हुआ है। 

महाराष्ट्र कृषि विभाग के नवीनतम साप्ताहिक आंकड़ों से पता चलता है कि राज्य में इस वर्ष 10 नवम्बर तक रबी फसलों का कुल उत्पादन क्षेत्र 9.15 लाख हेक्टेयर पर ही पहुंच सका

जो पिछले साल की समान अवधि के बिजाई क्षेत्र 15.34 लाख हेक्टेयर से 6.19 लाख हेक्टेयर कम है। लगभग सभी फसलों की बिजाई गत वर्ष से पीछे चल रही है जिसमें गेहूं, ज्वार, मक्का तथा चना आदि शामिल हैं। तिलहनों के रकबे में भी गिरावट आई है। 

आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार गत वर्ष के मुकाबले चालू, रबी सीजन के दौरान महाराष्ट्र में गेहूं का उत्पादन क्षेत्र 79 हजार हेक्टेयर से घटकर 42 हजार हेक्टेयर,

ज्वार का बिजाई क्षेत्र 7.36 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 4.22 लाख हेक्टेयर तथा मक्का का रकबा 1.02 लाख हेक्टेयर से फिसलकर 92 हजार हेक्टेयर पर अटक गया।

इसके फलस्वरूप गेहूं एवं मोटे अनाजों का कुल बिजाई क्षेत्र गत वर्ष के 9.18 लाख हेक्टेयर से घटकर इस बार 5.56 लाख हेक्टेयर अटक गया। 

इसी तरह, दलहन फसलों का उत्पादन क्षेत्र भी पिछले साल के 6.03 लाख हेक्टेयर से 3.54 लाख हेक्टेयर रह गया।

इसके तहत चना का बिजाई क्षेत्र 5.88 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 3.44 लाख हेक्टेयर तथा अन्य दलहनों का रकबा 15 हजार हेक्टेयर से फिसलकर 10 हजार हेक्टेयर पर आ गया। महाराष्ट्र चना  के अग्रणी उत्पादक राज्यों में शामिल है। 

पिछले साल 10 नवम्बर तक महाराष्ट्र में 13 हजार हेक्टेयर में तिलहन फसलों की बिजाई हुई थी जबकि इस बार रकबा 5 हजार हेक्टेयर तक ही पहुंच सका।

राज्य में सूरजमुखी एवं तिल सहित अन्य तिलहन फसलों की बिजाई तो आरंभ हो गई है मगर इसकी रफ्तार अभी बहुत धीमी है।

आगामी सप्ताहों के दौरान महाराष्ट्र में रबी फसलों की बिजाई की गति तेज हो सकती है क्योंकि कई फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य में अच्छी बढ़ोत्तरी की गई है।