महाराष्ट्र और कर्नाटक में गन्ना के अभाव से क्रशिंग प्रक्रिया समय से पूर्व बंद होने की संभावना
28-Jan-2025 06:21 PM
पुणे । देश के सबसे प्रमुख तथा तीसरे सबसे बड़े चीनी उत्पादक राज्य- महाराष्ट्र एवं कर्नाटक में गन्ना की कमी से मिलों में इसकी क्रशिंग का अभियान नियत समय से काफी पहले समाप्त हो जाने की आशंका है।
उसके फलस्वरूप चीनी के उत्पादन में भारी गिरावट आ सकती है। नेशनल फेडरेशन ऑफ को ऑपरेटिव शुगर फैक्टरीज (एन एफ सी एस एफ) ने चीनी का घरेलू उत्पादन 2023-24 सीजन के 319 लाख टन से 15 प्रतिशत या 49 लाख टन घटकर 2024-25 के वर्तमान सीजन में 270 लाख टन पर सिमट जाने का अनुमान लगाया है।
ध्यान देने की बात है कि इस बार महाराष्ट्र तथा कर्नाटक में गन्ना की क्रशिंग देर से शुरू हुई और क्रियाशील चीनी मिलों की संख्या भी घट गई।
इसके अलावा वहां एथनॉल निर्माण में गन्ना का उपयोग बढ़ाने का प्रयास भी किया जा रहा है। इससे चीनी उत्पादन के लिए गन्ना का अभाव महसूस होने लगा है। इन दोनों प्रांतों में गन्ना की औसत उपज दर तथा कुछ पैदावार में कमी आने की संभावना है। उत्तर प्रदेश में भी कीड़ों-रोगों से गन्ना की फसल को नुकसान हुआ है।
इतना ही नहीं बल्कि गन्ना से चीनी की औसत रिकवरी दर में भी कमी आई है। पिछले साल मानसून सीजन के दौरान कई इलाकों में मूसलाधार वर्षा होने तथा भयंकर बाढ़ आने से गन्ना के खेतों में पानी अटक गया था।
फेडरेशन के मैनेजिंग डायरेक्टर का कहना है कि 2024-25 का क्रशिंग सीजन नियत समय से करीब एक माह पहले ही समाप्त हो सकता है।
महाराष्ट्र तथा कर्नाटक की कुछ चीनी मिलों को बहुत कम मात्रा में गन्ना प्राप्त हो रहा है जिससे जनवरी के अंत तक उसके बंद होने की नौबत आ सकती है। बंद होने वाली चीनी मिलों की संख्या एक दर्जन तक पहुंचने का अनुमान है।
इसके अलावा मध्य फरवरी तक 20-25 अन्य चीनी मिलों में गन्ना की क्रशिंग बंद होने की संभावना है जबकि फरवरी के अंत तक अधिकांश इकाइयों में ताले लग सकते हैं। मार्च की समाप्ति तक गन्ना क्रशिंग एवं चीनी के उत्पादन का अभियान लगभग पूरी तरह बंद हो सकता है।
