मक्का आयात पर अमरीकी दबाव का भारी प्रतिरोध
10-Jul-2025 12:27 PM
नई दिल्ली। हालांकि द्विपक्षीय व्यापार संधि (एफटीए) के लिए जारी वार्ता के क्रम में अमरीका बार-बार भारत पर जीएम मक्का के आयात के लिए अपना बाजार खोलने हेतु दबाव डाल रहा है लेकिन भारतीय वार्ताकार इसका सख्त प्रतिरोध करते रहे हैं।
जानकारों के अनुसार भारतीय वार्ताकारों ने स्पष्ट कर दिया है कि देश में जीएम मक्का के उत्पादन, आयात, कारोबार तथा आयोग पर प्रतिबंध लगा हुआ है और कभी-कभार टैरिफ रेट कोटा (टीआरक्यू) प्रणाली के तहत 15 प्रतिशत के रियायती शुल्क पर 5 लाख टन तक गैर जीएम मक्का के आयात की अनुमति दी जाती है।
मक्का के सामान्य आयात पर भारी-भरकम सीमा शुल्क लगा हुआ है और इसमें कटौती होने पर स्वदेशी उत्पादकों को काफी नुकसान होगा और मक्का के घरेलू उत्पादन में भारी गिरावट आ जाएगी।
भारत के कृषि मंत्रालय तथा पशु पालन एवं मत्स्य पालन की विभाग मक्का पर आयात शुल्क में कटौती से उत्पन्न दुष्प्रभावों के बारे पहले ही गंभीर चिंता व्यक्त कर चुका है।
इन विभागों ने स्पष्ट कहा है कि सीमा शुल्क में कटौती होने से देश के लाखों किसानों का हित प्रभावित होगा। वर्तमान समय में इस महत्वपूर्ण मोटे अनाज का भाव न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) के आसपास या उससे ऊपर चल रहा है और किसानों को अच्छी आमदनी प्राप्त हो रही है।
यदि सस्ते आयात से घरेलू बाजार मूल्य में नरमी आई तो मक्का की खेती के प्रति किसानों का उत्साह एवं आकर्षण तेजी से घट जाएगा और फिर इसके आयात पर देश की निर्भरता बढ़ती चली जाएगी। मक्का की घरेलू मांग एवं खपत में हो रही वृद्धि को स्वदेशी उत्पादन से पूरा करने का प्रयास किया जा रहा है।
लेकिन व्यापार विश्लेषकों की राय इससे कुछ भिन्न है। उसका कहना है कि भारत में पहले भी यूक्रेन तथा म्यांमार जैसे देशों से मक्का के शुल्क मुक्त आयात की अनुमति दी गई थी लेकिन घरेलू बाजार मूल्य पर उसका कोई खास असर नहीं पड़ा।
लेकिन यहां इस एक महत्वपूर्ण तथ्य को नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए कि इन देशों से सीमित मात्रा में मक्का मंगाया गया जबकि अमरीका दुनिया में मक्का का सबसे प्रमुख उत्पादक और निर्यातक देश है।
