मक्का को मक्का ने मारा: एथेनॉल ने बदला मक्का का भाग्य

14-Jun-2025 07:49 PM

मक्का को मक्का ने मारा: एथेनॉल ने बदला मक्का का भाग्य

कभी जो मक्का केवल पोल्ट्री और पशुपालन में चारे के रूप में सीधा इस्तेमाल होता था, वहीं अब यह भारत की कृषि अर्थव्यवस्था में एक अहम भूमिका निभा रहा है।

बाजार सामान्य रूप से चल रहा था, लेकिन जैसे ही सरकार का पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने का सपना सामने आया, कहानी का क्लाइमैक्स ही बदल गया।

करीब 10 साल पहले मक्का ₹1000 प्रति क्विंटल से भी कम में बिकता था, लेकिन जब सरकार ने मक्के से एथेनॉल बनाने की अनुमति दी, तो इसका मूल्य एक समय ₹2700 प्रति क्विंटल तक पहुंच गया। यह सुनहरा दौर देखकर कई व्यापारी, स्टॉकिस्ट और निवेशक इस क्षेत्र में कूद पड़े और बाजार में अफरा-तफरी मची

अब लगातार तीसरे साल रिकॉर्ड उत्पादन हो रहा है। कई व्यापारियों ने भारी मात्रा में मक्का का भंडारण कर रखा है, इस उम्मीद में कि भविष्य में कीमतें फिर से आसमान छुएंगी, लेकिन यह अब व्यापार के लिए खतरनाक बनता जा रहा है।

अब एथेनॉल केवल मक्का से नहीं गन्ना और चावल जैसे स्रोतों से भी बनने लगा है। 

मक्का से एथेनॉल बनने के बाद जो उप-उत्पाद DDGS निकलता है, वह पशु आहार उद्योग के लिए सबसे सस्ता और प्रोटीन युक्त स्रोत है। बड़ी मात्रा में उपलब्ध यह उत्पाद अब सीधे मक्के की खपत को तेजी से घटा रहा है।

आज मक्का वह पीला सोना बन गया है जिसे कभी कोई पूछता भी नहीं था। लेकिन DDGS के कारण अब उसी मक्के की मांग कम हो रही है, यह स्थिति कहावत को चरितार्थ करती है:

लोहा लोहे को काटता है  को अब कहा जा सकता है की मक्का को मक्का ही काट रही है।

अब अमेरिका भारत पर दबाव बना रहा है कि वह एथेनॉल उत्पादन के लिए मक्का का आयात शुरू करे। नीति आयोग भी इस विषय पर विचार कर रहा है।

यदि यह होता है तो घरेलू मक्का उत्पादकों और व्यापारियों के लिए यह सपना और अधिक टूटने जैसा होगा, जो अभी भी ऊंचे दामों का सपना देख रहे हैं।