मक्का का रकबा गत वर्ष से 3 लाख हेक्टेयर पीछे
07-Sep-2026 12:48 PM
नई दिल्ली। मोटे अनाजों का सकल उत्पादन क्षेत्र चालू खरीफ सीजन में घटकर 181.40 लाख हेक्टेयर रह गया जो पिछले साल के बिजाई क्षेत्र 182.50 लाख हेक्टेयर से 1.10 लाख हेक्टेयर कम है। यह 4 सितम्बर तक का आंकड़ा है।
हालांकि इस अवधि में ज्वार एवं बाजरा के बिजाई क्षेत्र में अच्छी बढ़ोत्तरी हुई मगर मक्का एवं रागी का रकबा काफी घट गया। स्मॉल मिलेट्स के उत्पादन क्षेत्र में कुछ इजाफा हुआ है।
पिछले साल की तुलना में मौजूदा खरीफ सीजन के दौरान ज्वार का उत्पादन क्षेत्र 12.61 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 13.58 लाख हेक्टेयर तथा बाजरा का बिजाई क्षेत्र 62.87 लाख हेक्टेयर से उछलकर 64.86 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया लेकिन रागी का रकबा 8.77 लाख हेक्टेयर से घटकर 7.60 लाख हेक्टेयर तथा मक्का का क्षेत्रफल 94.10 लाख हेक्टेयर से लुढ़ककर 91.10 लाख हेक्टेयर रह गया। स्मॉल मिलेट्स का बिजाई क्षेत्र 4.15 लाख हेक्टेयर से सुधरकर 4.26 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा।
बाजरा का बिजाई क्षेत्र कई सप्ताहों तक गत वर्ष से पीछे रहने की बात अब 2 लाख हेक्टेयर आगे हो गया है। लेकिन मक्का और रागी का रकबा शुरू से ही पीछे चल रहा है और अभी तक पीछे ही है। कई राज्यों में मक्का की बिजाई के प्रति किसानों के उत्साह एवं आकर्षण में कमी आई है क्योंकि इसका बाजार भाव आकर्षक नहीं रहा और न ही सरकार द्वारा इसके न्यूनतम समर्थन मूल्य में भी मामूली बढ़ोत्तरी की गई है।
अमरीकी कृषि विभाग (उस्डा) की विदेश कृषि सेवा (फास) के नई दिल्ली स्थित प्रतिनिधि ने भारत में मक्का का उत्पादन 50 लाख टन घटने का अनुमान लगाया है। केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के अनुसार मक्का का घरेलू उत्पादन 2024-25 सीजन के 434 लाख टन से उछलकर 2025-26 के सम्पूर्ण सीजन में 550 लाख टन के सर्वकालीन सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया जबकि उस्डा पोस्ट ने 2026-27 के सीजन में उत्पादन घटकर 500 लाख टन रह जाने की संभावना व्यक्त की है।
