धान के उत्पादन क्षेत्र में 16.37 लाख हेक्टेयर की गिरावट
07-Sep-2026 03:20 PM
नई दिल्ली। खरीफ सीजन के सबसे प्रमुख खाद्यान्न धान के उत्पादन क्षेत्र में इस बार भारी गिरावट देखी जा रही है। यह गिरावट केवल पिछले साल के मुकाबले देखी जा रही है। दरअसल वर्ष 2025 में धान का उत्पादन क्षेत्र तेजी से उछलकर नए रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गया था। चालू वर्ष का रकबा पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल से ऊपर पहुंच गया है।
केन्द्रीय कृषि मंत्रालय के नवीनतम आंकड़ों से पता चलता है कि चालू खरीफ सीजन के दौरान धान का कुल उत्पादन क्षेत्र 4 सितम्बर तक 421.82 लाख हेक्टेयर पर पहुंचा जो पिछले साल की इसी अवधि के रकबा 433.19 लाख हेक्टेयर से 16.37 लाख हेक्टेयर कम लेकिन पंचवर्षीय औसत क्षेत्रफल 405.46 लाख हेक्टेयर से काफी अधिक है।
दरअसल इस वर्ष जून में दक्षिण- पश्चिम मानसून काफी सुस्त एवं कमजोर रहा था जिससे धान की खेती बहुत पिछड़ गई थी। जुलाई-अगस्त में अच्छी बारिश होने से इसके रकबे में काफी सुधार आया लेकिन फिर भी यह गत वर्ष से पीछे रह गया। पिछले साल धान की खेती काफी तेज गति से हुई थी।
भारतीय खाद्य निगम (एफसीआई) के पास चावल का अत्यन्त विशाल स्टॉक मौजूद है और घरेलू प्रभाग में इसकी आपूर्ति एवं उपलब्धता की स्थिति भी सुगम बनी हुई है इसलिए अगर 2026-27 के सीजन में उत्पादन कुछ घटता है तब भी कुछ खास फर्क नहीं पड़ेगा।
अमरीकी कृषि विभाग (उस्डा) की भारतीय प्रतिनिधि कार्यालय (उस्डा पोस्ट) ने 2026-27 के सम्पूर्ण सीजन में भारत में चावल का उत्पादन घटकर 1470 लाख टन पर सिमटने का अनुमान लगाया है जो 2025-26 सीजन के कुल उत्पादन 1540 लाख टन से 70 लाख टन या 4.5 प्रतिशत कम है।
