मक्‍का साप्ताहिक रिपोर्ट

06-Sep-2025 06:28 PM

दिल्ली बिल्टी मार्केट (उत्तर प्रदेश लाइन)

इस सप्ताह दिल्ली की उत्तर प्रदेश लाइन में बिल्टी कट भाव पूरी तरह स्थिर रहे। उत्तर प्रदेश का भाव 2,350 रुपये प्रति क्विंटल और बिहार का भाव भी 2,600 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर रहा।

उत्तर प्रदेश (झांगीराबाद मंडी)

सप्ताह की शुरुआत में झांगीराबाद मंडी में भाव 2,100-2,150 रुपये प्रति क्विंटल थे, लेकिन सप्ताह के मध्य में दबाव बढ़ा। 4 सितम्बर को भाव 1,900-2,200 रुपये पर आ गए और 6 सितम्बर को मंडी खुलने पर भाव और घटकर 1,800-2,200 रुपये प्रति क्विंटल तक आ गए। इस हफ्ते झांगीराबाद मंडी में मक्‍का के दामों में स्पष्ट गिरावट देखी गई।

महाराष्ट्र  (जालना मंडी)

जालना मंडी में सप्ताह की शुरुआत से अंत तक भाव 1,750-2,300 रुपये प्रति क्विंटल पर स्थिर रहे।

महाराष्ट्र (सांगली मंडी)

सांगली मंडी इस हफ्ते सबसे स्थिर रही। सप्ताह की शुरुआत से बुधवार तक 2,400-2,475 रुपये प्रति क्विंटल के भाव स्थिर रहे। 5 सितम्बर को मामूली गिरावट दर्ज की गई और भाव 2,400-2,450 रुपये पर आ गए। 6 सितम्बर को भी हल्की नरमी रही, जहां भाव 2,375-2,450 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुए।

बिहार (गुलाबबाग मंडी)

गुलाबबाग मंडी पूरे सप्ताह स्थिरता के साथ 2,150-2,350 रुपये प्रति क्विंटल पर टिकी रही।

कर्नाटक  (गुलबर्गा मंडी)

गुलबर्गा मंडी 3 और 4 सितम्बर को खुली रही, जहां भाव 2,300-2,500 रुपये प्रति क्विंटल रहे। कुल मिलाकर मक्‍का बाजारों में मिला-जुला रुख रहा। बढ़ती डिमांड के कारण चालू खरीफ सीजन की फसलों की बुवाई में सबसे बड़ी बढ़त देखने को मिली। सभी राज्यों में मक्‍का का क्षेत्रफल बढ़ा और सरकारी आंकड़ों के अनुसार 28.08.25 तक बुवाई पिछले वर्ष के मुकाबले 9.3 लाख हेक्टेयर की बड़ी बढ़ोतरी के बाद 94 लाख हेक्टेयर तक पहुंची। यह खरीफ मक्‍का की अब तक की सबसे बड़ी बुवाई है।

उत्पादन 

बड़ी बुवाई से उत्पादन बढ़ने के साफ संकेत मिल रहे हैं। हालाँकि, कई राज्यों में हो रही बारिश से फसल को हानि पहुंची है, परंतु बुवाई क्षेत्र इतना बढ़ा है कि इसका कुल उत्पादन पर असर नहीं पड़ेगा।

एथनॉल 

अब एथनॉल बनाने के लिए चीनी और चावल का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है, जो पहले प्रतिबंधित था। एथनॉल  में मक्‍का का इस्तेमाल इस वर्ष थोड़ा घट सकता है। अगर मक्‍का द्वारा निर्मित एथनॉल  की कीमतें बढ़ाई गईं तो इसका विपरीत असर पड़ेगा, यानी मक्‍का का एथनॉल में इस्तेमाल बढ़ जाएगा। 

पशु चारा 

समय का बदलाव देखिए, जिस मक्‍का का पहले पशु चारे में इस्तेमाल होता था, अब उससे ईंधन बनाया जा रहा है।